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Kumar gyaneshwar
saath mere jo haadsa hua hai
saath mere jo haadsa hua hai | साथ मेरे जो हादसा हुआ है
- Kumar gyaneshwar
साथ
मेरे
जो
हादसा
हुआ
है
कौन
सा
पहली
मर्तबा
हुआ
है
होता
है
सब
के
साथ
इश्क़
में
जो
हक़
में
मेरे
वो
फ़ैसला
हुआ
है
वो
मोहब्बत
की
बातें
करती
है
अब
साथ
उसके
भी
कुछ
बुरा
हुआ
है
रूह
का
रास्ता
बदन
नहीं
बस
तजरबा
मैंने
ये
किया
हुआ
है
लड़ता
है
जंग
जो
अकेले
कभी
उसके
ही
हिस्से
काफ़िला
हुआ
है
एक
लड़की
ने
फिर
से
चाहा
मुझे
दोस्त
मतलब
कि
मसअला
हुआ
है
मेरा
बस
एक
मशवरा
है
उसे
भूल
जाओ
कि
राब्ता
हुआ
है
- Kumar gyaneshwar
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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अहबाब
मेरा
कितना
ज़ियादा
बदल
गया
तू
पूछता
है
मुझ
से
भला
क्या
बदल
गया
अब
तू
तड़ाक
करता
है
वो
बात
बात
पर
अब
उस
के
बात
चीत
का
लहजा
बदल
गया
क़ुर्बत
में
उस
के
अच्छे
से
अच्छे
बदल
गए
जो
मैं
भी
उस
के
पास
जा
बैठा
बदल
गया
पहले
तो
साथ
रहने
की
हामी
बहुत
भरी
फिर
एक
रोज़
उस
का
इरादा
बदल
गया
लैला
बदल
गई
तो
गई
साथ
साथ
ही
मजनूँ
बदल
गया
ये
ज़माना
बदल
गया
तस्वीर
अर्से
बाद
बदलती
है
सब्र
रख
ऐसा
नहीं
न
होता
कि
सोचा
बदल
गया
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shaan manral
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दर्द-ए-मुहब्बत
दर्द-ए-जुदाई
दोनों
को
इक
साथ
मिला
तू
भी
तन्हा
मैं
भी
तन्हा
आ
इस
बात
पे
हाथ
मिला
Abrar Kashif
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बड़ी
मुश्किल
से
नीचे
बैठते
हैं
जो
तेरे
साथ
उठते
बैठते
हैं
Khurram Afaq
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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अच्छा
है
दिल
के
साथ
रहे
पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन
कभी
कभी
इसे
तन्हा
भी
छोड़
दे
Allama Iqbal
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कभी
चाहत
पे
शक
करते
हुए
ये
भी
नहीं
सोचा
तुम्हारे
साथ
क्यूँ
रहते
अगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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तेरे
बग़ैर
मुझको
भला
क्या
दिखाई
दे
तू
साथ
हो
तो
शहर
ये
अच्छा
दिखाई
दे
ये
लोग
ये
फ़ज़ा
ये
दर-ओ-बाम
सब
हैं
पर
मुमकिन
नहीं
कि
कोई
जो
तुझ
सा
दिखाई
दे
सारे
ख़याल
ख़ुद-कुशी
के
छोड़
दूँगा
मैं
जो
ख़्वाब
में
भी
मुझको
तू
मेरा
दिखाई
दे
हम
आशिक़ों
की
बस
यही
ख़्वाहिश
रही
है
अब
हमको
तमाम
उम्र
ये
चेहरा
दिखाई
दे
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Kumar gyaneshwar
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करता
भी
और
क्या
ज़िन्दगी
में
लगता
है
बस
ये
मन
शा'इरी
में
इस
सेे
अच्छा
तो
तुम
इश्क़
करते
क्या
मिला
तुमको
यूँँ
ख़ुद-कुशी
में
एक
औरत
ही
बस
जानती
है
राज़
ख़ुश
होने
का
बेबसी
में
कोई
राधा
या
मीरा
से
पूछे
कटते
हैं
कैसे
दिन
आशिक़ी
में
एक
माँ-
बाप
जिसके
अलावा
छोड़
जाते
हैं
सब
मुफ़्लिसी
में
तुम
मोहब्बत
का
मतलब
यूँँ
समझो
राम
का
रोना
उस
बेकली
में
इश्क़
उन
लड़कियों
से
भी
क्या
जो
पास
आती
नहीं
तिश्नगी
में
मैं
उसे
दोस्त
कहता
नहीं
अब
शर्त
जिसने
रखी
दोस्ती
में
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Kumar gyaneshwar
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रंग
लाल
और
इक
अदा-ए-ख़ास
चेहरा
जी
रहा
है
देखकर
जिसे
उदास
चेहरा
क्यूँ
करें
ग़मो
का
ज़िक्र
अब
किसी
के
पास
हम
साथ
है
मिरे
जो
एक
ग़म
शनास
चेहरा
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Kumar gyaneshwar
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चाहते
हो
उसे
पता
न
लगे
दूसरा
इश्क़
दूसरा
न
लगे
बेवफ़ाई
गुनाह
है
और
तुम
सोचते
हो
कि
बद-दु'आ
न
लगे
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Kumar gyaneshwar
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जो
बना
के
तुझको
दुनिया
हसीं
नहीं
करता
फिर
यहाँ
ख़ुदा
पर
कोई
यक़ीं
नहीं
करता
Kumar gyaneshwar
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