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Kumar gyaneshwar
jo banaa ke tujhko duniya haseen nahin karta
jo banaa ke tujhko duniya haseen nahin karta | जो बना के तुझको दुनिया हसीं नहीं करता
- Kumar gyaneshwar
जो
बना
के
तुझको
दुनिया
हसीं
नहीं
करता
फिर
यहाँ
ख़ुदा
पर
कोई
यक़ीं
नहीं
करता
- Kumar gyaneshwar
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ऐ
मुझ
को
फ़रेब
देने
वाले
मैं
तुझ
पे
यक़ीन
कर
चुका
हूँ
Athar Nafees
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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यक़ीं
कैसे
करूँँ
वादों
पे
तेरे
साथ
रहने
के
यही
वादे
किए
होंगे
उन्होंने
भी
जो
बिछड़े
हैं
Priya Dixit
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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न
कोई
वा'दा
न
कोई
यक़ीं
न
कोई
उमीद
मगर
हमें
तो
तिरा
इंतिज़ार
करना
था
Firaq Gorakhpuri
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भरोसा
मुझ
पे
रक्खो
और
कुछ
पल
रुका
हूँ,
मैं
अभी
हारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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जब
अपना
दिल
ख़ुद
ले
डूबे
औरों
पे
सहारा
कौन
करे
कश्ती
पे
भरोसा
जब
न
रहा
तिनकों
पे
भरोसा
कौन
करे
Anand Narayan Mulla
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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चाहिए
ख़ुद
पे
यक़ीन-ए-कामिल
हौसला
किस
का
बढ़ाता
है
कोई
Shakeel Badayuni
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हम
आज
राह-ए-तमन्ना
में
जी
को
हार
आए
न
दर्द-ओ-ग़म
का
भरोसा
रहा
न
दुनिया
का
Waheed Quraishi
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इस
क़दर
बदन
से
है
राब्ता
उदासी
का
रोज़
ढ़ूँढ़
लाता
है
ज़ाइक़ा
उदासी
का
हम
सेे
कोई
पूछे
क्या
होता
है
मोहब्बत
में
हम
हीं
जानते
हैं
बस
मसअला
उदासी
का
फ़ेर
लेती
है
चेहरा
देखकर
ये
दुनिया
अब
दोस्त
कुछ
तो
है
आख़िर
फ़ाइदा
उदासी
का
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Kumar gyaneshwar
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देखो
इतना
भी
ये
आसान
नहीं
होता
है
ग़म
हो
तो
कौन
परेशान
नहीं
होता
है
इश्क़
में
ख़ुद-कुशी
करने
जा
रहे
ऐ
लड़के
तुम
तो
कहते
थे
कि
नुक़सान
नहीं
होता
है
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Kumar gyaneshwar
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है
नहीं
अब
जो
रिश्ता
हमारा
कर
रहा
क्यूँ
तू
चर्चा
हमारा
बाँधी
थी
तुमने
हाथों
घड़ी
जब
ख़ुश
था
कितना
ये
चेहरा
हमारा
इक
तिरे
माथे
पर
बोसा
देकर
टूटता
था
यूँँ
रोज़ा
हमारा
कहता
हूँ
सब
सेे
रोता
नहीं
मैं
आँखें
ही
जाने
गिर्या
हमारा
तेरे
जाने
पे
अब
सोचता
हूँ
था
कभी
तू
ही
साया
हमारा
अब
न
कर
हम
सेे
बातें
वफ़ा
की
जानता
है
तू
ग़ुस्सा
हमारा
बाद
तेरे
बदल
जाना
है
सब
छोड़कर
बस
ये
लहजा
हमारा
इश्क़
करने
से
पहले
ऐ
लड़कों
देख
लेना
ये
कतबा
हमारा
शा'इरी
और
ये
नौकरी
भी
दोनों
से
चलता
ख़र्चा
हमारा
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Kumar gyaneshwar
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मुहब्बत
करूँँ
और
मुहब्बत
दी
जाए
कि
मुझ
जैसों
को
ये
सुहूलत
दी
जाए
उसे
देखूँ
तो
देखता
ही
रहूँ
फिर
ख़ुदा
आँखों
को
ये
बसारत
दी
जाए
बनाना
हो
गर
कोई
शय
ख़ूब-सूरत
बना
कर
उसे
तेरी
सूरत
दी
जाए
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Kumar gyaneshwar
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वफ़ा
की
बात
पर
इतनी
शिकायत
कौन
करता
है
न
जाने
इन
गुलाबों
से
मोहब्बत
कौन
करता
है
हमारे
साथ
रहकर
तुम
भी
इतना
सीख
जाओगे
पुरानी
याद
की
आख़िर
हिफाज़त
कौन
करता
है।
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Kumar gyaneshwar
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