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Rohit Gustakh
zamaane men kisi se dil lagaakar
zamaane men kisi se dil lagaakar | ज़माने में किसी से दिल लगाकर
- Rohit Gustakh
ज़माने
में
किसी
से
दिल
लगाकर
किसी
का
दिल
दुखाया
था
किसी
ने
- Rohit Gustakh
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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दिल
हारने
के
बाद
ही
आता
है
ये
सुख़न
अब
तक
किसी
ने
कोख
से
शायर
नहीं
जना
Anas Khan
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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रक़ीबों
ने
कहा
मुझ
सेे
दिखाओ
रूम
तुम
अपना
किताबें
ग़म
उदासी
और
इक
फ़ोटो
मिली
उनको
Rohit Gustakh
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छोड़
गई
अबके
वो
भी
मुझको
जो
सिगरेट
छुड़ाया
करती
थी
Rohit Gustakh
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हर
पल
इक
पागल
की
ख़ातिर
ख़्वाब
सजाये
कल
की
ख़ातिर
जिस
पल
में
जीनी
थीं
सदियाँ
आया
वो
इक
पल
की
ख़ातिर
बेच
गिटार
हुआ
दीवाना
तेरी
इस
पायल
की
ख़ातिर
ले
आए
दिल
बुनकर
अपना
सर्दी
में
कम्बल
की
ख़ातिर
ठुकरा
दी
है
जग
की
दौलत
इक
तेरे
आँचल
की
ख़ातिर
ग़ालिब
की
गलियों
में
हम
भी
भटके
नज़्म
ग़ज़ल
की
ख़ातिर
क़ैद
किया
वारिद
को
हमने
आज
तिरे
काजल
की
ख़ातिर
रहती
है
अनबन
पेड़ों
में
उस
मीठी
कोयल
की
ख़ातिर
मोड़
लिया
मुँह
सब
रागों
से
नदियों
की
कल
कल
की
ख़ातिर
ज़ुल्म
सहे
कीचड़
के
हमने
उस
महबूब
कमल
की
ख़ातिर
किसको
अपना
समझे
धरती
जोगिन
है
बादल
की
ख़ातिर
आज
हुई
दिल
से
गुस्ताख़ी
छोड़
दिया
सब
कल
की
ख़ातिर
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Rohit Gustakh
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ये
भी
मशहूर
था
कूचे
में
उस
के
जिसे
तुम
लोग
पागल
कह
रहे
हो
Rohit Gustakh
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नाम
से
डर
के
मुझको
डराता
रहा
एक
ग़म
ज़िन्दगी
भर
सताता
रहा
होश
भी
था
मुझे
था
मैं
मदहोश
भी
दीप
जलता
रहा
फड़फड़ाता
रहा
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Rohit Gustakh
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