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Rohit Gustakh
naam se dar ke mujhko daraata raha
naam se dar ke mujhko daraata raha | नाम से डर के मुझको डराता रहा
- Rohit Gustakh
नाम
से
डर
के
मुझको
डराता
रहा
एक
ग़म
ज़िन्दगी
भर
सताता
रहा
होश
भी
था
मुझे
था
मैं
मदहोश
भी
दीप
जलता
रहा
फड़फड़ाता
रहा
- Rohit Gustakh
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शग़्ल
था
दश्त-नवर्दी
का
कभी
ऐ
'ताबाँ'
अब
गुलिस्ताँ
में
भी
जाते
हुए
डर
लगता
है
Anwar Taban
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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हमीं
को
क़ातिल
कहेगी
दुनिया
हमारा
ही
क़त्ल-ए-आम
होगा
हमीं
कुएँ
खोदते
फिरेंगे
हमीं
पे
पानी
हराम
होगा
अगर
यही
ज़ेहनियत
रही
तो
मुझे
ये
डर
है
कि
इस
सदी
में
न
कोई
अब्दुल
हमीद
होगा
न
कोई
अब्दुल
कलाम
होगा
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Meraj Faizabadi
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दीवार-ओ-दर
पे
'कृष्णा'
की
लीला
के
नक़्श
है
मंदिर
है
ये
तो
'कृष्ण'
के
दरबार
की
तरह
Shobha Kukkal
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मैं
न
कहता
था
हिज्र
कुछ
भी
नहीं
ख़ुद
को
हलकान
कर
रही
थी
तुम
कितने
आराम
से
हैं
हम
दोनों
देखा
बेकार
डर
रही
थी
तुम
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Mehshar Afridi
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इस
दर
का
हो
या
उस
दर
का
हर
पत्थर
पत्थर
है
लेकिन
कुछ
ने
मेरा
सर
फोड़ा
हैं
कुछ
पर
मैं
ने
सर
फोड़ा
है
Zubair Ali Tabish
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राम
होने
में
या
रावण
में
है
अंतर
इतना
एक
दुनिया
को
ख़ुशी
दूसरा
ग़म
देता
है
हम
ने
रावण
को
बरस
दर
बरस
जलाया
है
कौन
है
वो
जो
इसे
फिर
से
जनम
देता
है
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Kumar Vishwas
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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भले
दुनिया
जला
डाले
मदारी
तुम्हें
तो
बस
तमाशा
देखना
है
Rohit Gustakh
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अचानक
ही
परीक्षा
ज़िन्दगी
ने
ली
रिवीजन
भी
नहीं
करने
दिया
मुझको
Rohit Gustakh
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बिछड़ते
वक़्त
ये
वा'दा
किया
उसने
कि
बेटी
का
मुहब्बत
नाम
रक्खेगी
Rohit Gustakh
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दर्द,
मुहब्बत,
तन्हाई
है
लड़कों
में
किसने
अफवाह
फैलाई
है
लड़कों
में
इक
दूजे
से
कटे
कटे
से
रहते
हैं
क्या
कोई
लड़की
आई
है
लड़को
में
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Rohit Gustakh
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जिसे
तुम
कह
रहे
हो
प्यार
अपना
सुनो
प्यारे
अमानत
है
किसी
की
Rohit Gustakh
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