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Rohit Gustakh
ghazal ki naav men baithe hue ham
ghazal ki naav men baithe hue ham | ग़ज़ल की नाव में बैठे हुए हम
- Rohit Gustakh
ग़ज़ल
की
नाव
में
बैठे
हुए
हम
तेरे
ग़म
से
किनारा
कर
रहे
है
- Rohit Gustakh
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उठाओ
कैमरा
तस्वीर
खींच
लो
इन
की
उदास
लोग
कहाँ
रोज़
मुस्कराते
हैं
Malikzada Javed
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मेरी
बरसों
की
उदासी
का
सिला
कुछ
तो
मिले
उस
से
कह
दो
वो
मेरा
क़र्ज़
चुकाने
आए
Khalil Ur Rehman Qamar
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पत्थर
के
जिगर
वालो
ग़म
में
वो
रवानी
है
ख़ुद
राह
बना
लेगा
बहता
हुआ
पानी
है
Bashir Badr
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ग़म
है
तो
कोई
लुत्फ़
नहीं
बिस्तर-ए-गुल
पर
जी
ख़ुश
है
तो
काँटों
पे
भी
आराम
बहुत
है
Kaleem Aajiz
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मज़ाक
सहना
नहीं
है
हँसी
नहीं
करनी
उदास
रहने
में
कोई
कमी
नहीं
करनी
Swapnil Tiwari
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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आँख
में
नम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
उसके
ग़म
तक
आ
पहुँचा
हूँ
पहली
बार
मुहब्बत
की
थी
आख़री
दम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
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Khalil Ur Rehman Qamar
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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आधी
से
ज़ियादा
शब-ए-ग़म
काट
चुका
हूँ
अब
भी
अगर
आ
जाओ
तो
ये
रात
बड़ी
है
Saqib lakhanavi
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मोहब्बत
को
पराई
कर
रही
हो
सुना
है
तुम
सगाई
कर
रही
हो
यहाँ
बस
ज़िंदगी
इक
तीरगी
है
वहाँ
तुम
मुँह-दिखाई
कर
रही
हो
क़फ़स
मायूस
हो
कर
रो
रहा
है
परिंदे
की
रिहाई
कर
रही
हो
ग़म-ए-दुनिया
से
आगे
कुछ
नहीं
है
जहाँ
तुम
आशनाई
कर
रही
हो
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Rohit Gustakh
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उतर
आओ
धरा
पर
अब
तो
गंगे
कमी
क्या
है
भगीरथ
की
लगन
में
Rohit Gustakh
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हर
पल
इक
पागल
की
ख़ातिर
ख़्वाब
सजाये
कल
की
ख़ातिर
जिस
पल
में
जीनी
थीं
सदियाँ
आया
वो
इक
पल
की
ख़ातिर
बेच
गिटार
हुआ
दीवाना
तेरी
इस
पायल
की
ख़ातिर
ले
आए
दिल
बुनकर
अपना
सर्दी
में
कम्बल
की
ख़ातिर
ठुकरा
दी
है
जग
की
दौलत
इक
तेरे
आँचल
की
ख़ातिर
ग़ालिब
की
गलियों
में
हम
भी
भटके
नज़्म
ग़ज़ल
की
ख़ातिर
क़ैद
किया
वारिद
को
हमने
आज
तिरे
काजल
की
ख़ातिर
रहती
है
अनबन
पेड़ों
में
उस
मीठी
कोयल
की
ख़ातिर
मोड़
लिया
मुँह
सब
रागों
से
नदियों
की
कल
कल
की
ख़ातिर
ज़ुल्म
सहे
कीचड़
के
हमने
उस
महबूब
कमल
की
ख़ातिर
किसको
अपना
समझे
धरती
जोगिन
है
बादल
की
ख़ातिर
आज
हुई
दिल
से
गुस्ताख़ी
छोड़
दिया
सब
कल
की
ख़ातिर
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Rohit Gustakh
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दबाती
है
गला
मेरा
ख़मोशी
उदासी
झाँकती
है
खिड़कियों
से
Rohit Gustakh
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दर्द,
मुहब्बत,
तन्हाई
है
लड़कों
में
किसने
अफवाह
फैलाई
है
लड़कों
में
इक
दूजे
से
कटे
कटे
से
रहते
हैं
क्या
कोई
लड़की
आई
है
लड़को
में
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Rohit Gustakh
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