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Rohit Gustakh
chhod gaii abke vo bhi mujhko
chhod gaii abke vo bhi mujhko | छोड़ गई अबके वो भी मुझको
- Rohit Gustakh
छोड़
गई
अबके
वो
भी
मुझको
जो
सिगरेट
छुड़ाया
करती
थी
- Rohit Gustakh
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कमरे
में
फैलता
रहा
सिगरेट
का
धुआँ
मैं
बंद
खिड़कियों
की
तरफ़
देखता
रहा
Kafeel Aazar Amrohvi
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बला
की
ख़ूब-सूरत
वो
उसे
ही
देख
जीता
हूँ
मुझे
उसकी
ज़रूरत
है,
न
मैं
उसका
चहीता
हूँ
कभी
उसको
परेशानी
मिरे
सिगरेट
से
होती
थी
उसे
बोलो
अभी
कोई
कि
मैं
दारू
भी
पीता
हूँ
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Deepankar
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कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
Nadeem Shaad
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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देख
तो
दिल
कि
जाँ
से
उठता
है
ये
धुआँ
सा
कहाँ
से
उठता
है
गोर
किस
दिलजले
की
है
ये
फ़लक
शोला
इक
सुब्ह
यां
से
उठता
है
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Meer Taqi Meer
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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बोलिए
फिर
क्या
लगाऊँ
होंठ
से
मैं
लीजिए
सिगरेट
पीना
बंद
कल
से
Neeraj Neer
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हम
दो
बंदे
हैं
और
सिगरेट
एक
अब
ख़बर
होगी
दोस्ती
की
दोस्त
Muzdum Khan
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नहीं
था
ध्यान
कोई
तोड़ते
हुए
सिगरेट
मैं
तुझ
को
भूल
गया
छोड़ते
हुए
सिगरेट
Afzal Khan
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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मुहब्बत
में
समझदारी
से
अक्सर
काम
लेते
हैं
कहीं
महबूब
वो
कहते
कहीं
वो
नाम
लेते
हैं
मचलता
है
कभी
जो
दिल
करें
बातें
निगाहों
से
इज़ाज़त
धड़कने
देतीं
वो
दिल
को
थाम
लेते
हैं
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Rohit Gustakh
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चूमकर
ज़ख़्म
फिर
से
हरा
कर
दिया
क्या
लगा
था
तुम्हें
मोजिज़ा
कर
दिया
आपके
इश्क़
का
क़र्ज़
था
मुझपे
जो
काटकर
हिज्र
की
शब
अदा
कर
दिया
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Rohit Gustakh
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बिना
बात
के
हम
लड़े
जा
रहे
हैं
कि
नज़दीक
आने
मरे
जा
रहे
हैं
Rohit Gustakh
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मिरे
घर
क्यूँँ
ले
आते
हो
गली
बाज़ार
की
बातें
चिढ़ाती
हैं
मुझे
झूठे
बिके
अख़बार
की
बातें
मुकरता
है
हमेशा
तू
किए
वादे
निभाने
से
तेरे
वादे
तिरी
क़स
में
हुईं
सरकार
की
बातें
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Rohit Gustakh
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