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Subrat Tripathi
qasmen tum to nahin khaati thii
qasmen tum to nahin khaati thii | क़स
- Subrat Tripathi
क़स
में
तुम
तो
नहीं
खाती
थी
फिर
भी
तुमने
छोड़
दिया
था
- Subrat Tripathi
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ख़ुदा
ने
फ़न
दिया
हमको
कि
लड़के
इश्क़
लिखेंगे
ख़ुदा
कब
जानता
था
हम,
ग़ज़ल
में
दर्द
भर
देंगे
Prashant Sharma Daraz
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जो
ज़हर
पी
चुका
हूँ
तुम्हीं
ने
मुझे
दिया
अब
तुम
तो
ज़िन्दगी
की
दुआएँ
मुझे
न
दो
Ahmad Faraz
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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कहाँ
चराग़
जलाएँ
कहाँ
गुलाब
रखें
छतें
तो
मिलती
हैं
लेकिन
मकाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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तेरी
हर
बात
मोहब्बत
में
गवारा
कर
के
दिल
के
बाज़ार
में
बैठे
हैं
ख़सारा
कर
के
आसमानों
की
तरफ़
फेंक
दिया
है
मैं
ने
चंद
मिट्टी
के
चराग़ों
को
सितारा
कर
के
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Rahat Indori
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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कहाँ
तो
तय
था
चराग़ाँ
हर
एक
घर
के
लिए
कहाँ
चराग़
मुयस्सर
नहीं
शहर
के
लिए
Dushyant Kumar
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बिछड़
जाएँगे
हम
दोनों
ज़मीं
पर
ये
उस
ने
आसमाँ
पर
लिख
दिया
है
Siraj Faisal Khan
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ये
इंतिज़ार
सहर
का
था
या
तुम्हारा
था
दिया
जलाया
भी
मैं
ने
दिया
बुझाया
भी
Aanis Moin
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चाँद
को
अपने
पकड़
में
कर
चुकी
है
चाँद
की
रौनक
जकड़
के
मर
चुकी
है
याद
रहते
थे
जिसे
तुम
मुँह
ज़बानी
याद
वो
तुम
सेे
बिछड़
के
मर
चुकी
है
तोड़
देता
है
नई
कलियाँ
मसलकर
यार
तेरी
रूह
सड़
के
मर
चुकी
है
रात
जब
चुभने
लगे
तो
ये
समझ
लो
आशिक़ी
तुमको
पकड़
में
कर
चुकी
है
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Subrat Tripathi
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आँखें
जब
बूढ़ी
होती
है
ठेस
अंगूठा
सह
लेता
है
Subrat Tripathi
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अब
तो
तुम्हें
ख़्वाब
में
देखता
हूँ
अब
तो
तुम्हें
भी
नहीं
पा
सकूँगा
Subrat Tripathi
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एक
हमीं
तेरे
अपने
हैं,
बाकी
सब
बेगाने
है
एक
हमीं
में
पागलपन
है,
बाकी
सब
दीवाने
है
Subrat Tripathi
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हादसों
के
ज़द
में
ही
ये
कट
रही
है
ज़िंदगी
उम्र
लेकिन
बढ़
रही
पर
घट
रही
है
ज़िंदगी
Subrat Tripathi
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