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Guru Gunour
mohabbat vasl hijr aur be-vafaaii
mohabbat vasl hijr aur be-vafaaii | मोहब्बत, वस्ल, हिज्र और बे-वफ़ाई
- Guru Gunour
मोहब्बत,
वस्ल,
हिज्र
और
बे-वफ़ाई
तज़ुरबे
ज़िंदगी
के
हो
चुके
सब
- Guru Gunour
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ज़िंदगी
ज़िंदा-दिली
का
है
नाम
मुर्दा-दिल
ख़ाक
जिया
करते
हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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ज़िंदगी
तू
ने
मुझे
क़ब्र
से
कम
दी
है
ज़मीं
पाँव
फैलाऊँ
तो
दीवार
में
सर
लगता
है
Bashir Badr
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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नहीं,
नहीं
जाँ,
तुम
नहीं
हो
बे-वफ़ा
या
बेमुरव्वत
वो
मैंने
शा'इरी
में
वज़्न
देने
के
लिए
यूँं
ही
लिखा
था
Guru Gunour
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वो
पत्थर
फेंकता
है
जानकर
भी
उसी
की
सिम्त
दरिया
बह
रहे
हैं
पहल
हमने
ही
की
थी
इश्क़
की
सो
तुम्हारे
सारे
नख़रे
सह
रहे
हैं
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Guru Gunour
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मु'आफ़
कीजिए,
मुझे
जाना
पड़ेगा
मैं
ग़मों
को
तन्हा
छोड़
आया
हूँ
Guru Gunour
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मेरी
मानो,
सँभल
जाओ,
पकड़
लो
रास्ता
घर
का
मोहब्बत
चार
दिन
की
है
ख़सारा
ज़िंदगी
भर
का
Guru Gunour
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