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Gulfam Ajmeri
bas rah na paa.e ham hamaare hi magar
bas rah na paa.e ham hamaare hi magar | बस रह न पाए हम हमारे ही मगर
- Gulfam Ajmeri
बस
रह
न
पाए
हम
हमारे
ही
मगर
इस
खेल
में
वैसे
तो
हारे
कुछ
नहीं
पागल
हो
जाए
देख
ले
बस
इक
नज़र
फिर
तो
तुम्हारे
जादू
टोने
कुछ
नहीं
- Gulfam Ajmeri
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इक
नज़ाकत
से
मुझे
उसने
पागल
बोला
जब
मैंने
चूम
लिया
प्यार
से
उसके
लब
को
Parwez Akhtar
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कोई
पागल
ही
मोहब्बत
से
नवाज़ेगा
मुझे
आप
तो
ख़ैर
समझदार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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न
तुम्हें
होश
रहे
और
न
मुझे
होश
रहे
इस
क़दर
टूट
के
चाहो
मुझे
पागल
कर
दो
Wasi Shah
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अब
मेरी
बात
ये
अफ़वाह
लगेगी
लेकिन
चाहता
हूँ
मैं
तुम्हें
आज
भी
पागल
की
तरह
Pravin Rai
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'आशिक़
का
ख़त
है
पढ़ना
ज़रा
देख-भाल
के
काग़ज़
पे
रख
दिया
है
कलेजा
निकाल
के
LALA RAKHA RAM BARQ
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तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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दश्त
छोड़े
हुए
अब
तो
अर्सा
हुआ
मैं
हूँ
मजनूँ
मगर
नाम
बदला
हुआ
मुझको
औरत
के
दुख
भी
पता
हैं
कि
मैं
एक
लड़का
हूँ
बेवा
का
पाला
हुआ
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Rishabh Sharma
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पागल
कैसे
हो
जाते
हैं
देखो
ऐसे
हो
जाते
हैं
Ali Zaryoun
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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दिल
भी
पागल
है
कि
उस
शख़्स
से
वाबस्ता
है
जो
किसी
और
का
होने
दे
न
अपना
रक्खे
Ahmad Faraz
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सुन
तिरे
बाद
क्या
क्या
हुआ
मेरे
साथ
वो
हुआ
जो
नहीं
होना
था
मेरे
साथ
कौन
करता
है
बर्बाद
किस
को
यहाँ
ज़िंदगी
शर्त
कोई
लगा
मेरे
साथ
वो
जो
आया
था
देने
दिलासा
मुझे
यूँँ
हुआ
वो
भी
रोने
लगा
मेरे
साथ
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Gulfam Ajmeri
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मुहब्बत
से
पहले
हमारी
मुहब्बत
के
चर्चे
हो
जाना
बड़ी
आम
सी
बात
है
इस
मुहब्बत
में
झगड़े
हो
जाना
चला
जाऊँ
मैं
भी
अगर
छोड़
कर
तुम
को
तन्हा
कहीं
पे
तुम्हारा
भी
बनता
है
तुम
भी
किसी
दूसरे
के
हो
जाना
पिता
जी
के
कहने
पे
उस
लड़की
ने
बात
तो
मान
ली
माँ
ये
तो
छोटी
सी
बात
है
ख़ुद-कुशी
जैसे
क़िस्से
हो
जाना
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Gulfam Ajmeri
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तेरे
बाद
क्या
ये
ख़ाक
ज़िन्दगी
रही
और
मिरा
पता
उदासी
पूछती
रही
मेरे
यार
मुझ
को
हिज्र
खा
गया
तिरा
और
मेरी
माँ
नज़र
उतारती
रही
तुम
तो
उठ
के
चल
दिए
मिरे
क़रीब
से
मेरी
ख़ामुशी
तुम्हें
पुकारती
रही
मेरे
सारे
ख़्वाब
जल
के
राख
हो
गए
और
इधर
हवा
चराग़
ढूँढती
रही
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Gulfam Ajmeri
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रात
वो
मेरे
घर
थे
आए
हुए
सारे
गर्द
ओ
ग़ुबार
छटते
हुए
कैसे
रौशन
करे
हँसी
कोई
जो
मुहब्बत
के
हो
सताए
हुए
रात
हम
करवटें
बदलते
रहे
ख़्वाब
आए
तिरे
दिखाए
हुए
याद
करते
तो
याद
आते
नहीं
भूलते
भी
नहीं
भुलाए
हुए
ये
अदाकारी
कुछ
न
आई
काम
रो
दिए
हम
तो
मुस्कुराते
हुए
मुझ
को
होता
नहीं
यक़ीं
क़ासिद
रो
पड़े
मुझ
को
याद
करते
हुए
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Gulfam Ajmeri
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गिला
कुछ
भी
नहीं
है
मौत
से
मुझको
पर
ख़ुदा
लेने
अगर
आया
तो
जाऊँगा
मैं
Gulfam Ajmeri
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