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Gulfam Ajmeri
hamaare saath hai saaya hamaara
hamaare saath hai saaya hamaara | हमारे साथ है साया हमारा
- Gulfam Ajmeri
हमारे
साथ
है
साया
हमारा
तो
भी
चेहरा
है
क्यूँँ
धुँधला
हमारा
इसे
है
हम
से
शिकवे
फिर
भी
लेकिन
नहीं
कर
सकती
कुछ
दुनिया
हमारा
किसी
भी
बात
पर
रोती
न
थी
जो
लहू
फिर
आँख
से
टपका
हमारा
पता
जैसे
चला
दिल
टूटने
का
उतारा
फिर
गया
पंखा
हमारा
चले
थे
साथ
जीने
और
मरने
अलग
हो
ही
गया
रस्ता
हमारा
न
जाने
गुम
कहाँ
है
नामा-बर
भी
अभी
तक
ख़त
नहीं
पहुँचा
हमारा
मैं
उस
से
हँस
के
बातें
कर
रहा
था
तो
ग़म
तकता
रहा
चेहरा
हमारा
- Gulfam Ajmeri
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ख़ुदा
की
शा'इरी
होती
है
औरत
जिसे
पैरों
तले
रौंदा
गया
है
तुम्हें
दिल
के
चले
जाने
पे
क्या
ग़म
तुम्हारा
कौन
सा
अपना
गया
है
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Ali Zaryoun
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इस
बात
पर
तू
हाथ
मिला
अब
तेरी
तरह
ग़म
का
लिबास
ओढ़
के
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
shaan manral
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आधी
से
ज़ियादा
शब-ए-ग़म
काट
चुका
हूँ
अब
भी
अगर
आ
जाओ
तो
ये
रात
बड़ी
है
Saqib lakhanavi
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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मज़ाक
सहना
नहीं
है
हँसी
नहीं
करनी
उदास
रहने
में
कोई
कमी
नहीं
करनी
Swapnil Tiwari
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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आँख
में
नम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
उसके
ग़म
तक
आ
पहुँचा
हूँ
पहली
बार
मुहब्बत
की
थी
आख़री
दम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
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Khalil Ur Rehman Qamar
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मुझ
से
पहली
मर्तबा
तू
जब
मिला
था
बज़्म
में
उस
वक़्त
तू
सब
से
जुदा
था
हिज्र
में
रोया
नहीं
फिर
मेरा
दिल
भी
इस
को
तो
तेरे
बिछड़ने
का
पता
था
क़ैस
भी
मारा
गया
राँझा
भी
वरना
चाहे
जो
कर
सकता
था
तू
तो
ख़ुदा
था
ख़ुद-कुशी
करता
नहीं
मैं
पर
मिरे
साथ
ज़िंदगी
तुझ
को
पता
है
क्या
हुआ
था
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Gulfam Ajmeri
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तुझ
से
मिलें
बातें
करें
सो
आ
बैठे
हम
और
इरादे
से
नहीं
आए
हैं
Gulfam Ajmeri
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ये
लेगी
आजमाइश
ज़िंदगी
कब
तक
यक़ीं
करता
रहेगा
आदमी
कब
तक
कहा
ग़म
से
के
छुट्टी
चाहिए
मुझ
को
मुझे
फिर
पूछा
ग़म
ने
वापसी
कब
तक
इधर
जल्दी
थी
घर
वालों
को
शादी
की
बता
तेरा
पता
मैं
ढूँढती
कब
तक
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Gulfam Ajmeri
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मिरा
तो
शा'इरी
से
बस
गुज़ारा
चल
रहा
है
तिरा
ज़ख़्मों
का
कारोबार
अच्छा
चल
रहा
है
तिरा
तो
हिज्र
भी
पुर-लुत्फ़
सा
लगता
है
मुझ
को
मुसलसल
अब
यही
चलने
दे
जैसा
चल
रहा
है
मैं
मंज़िल
पर
नहीं
पहुँचा
अभी
तक
ना-ख़ुदा
क्यूँ
ये
कश्ती
रुक
गई
है
या
किनारा
चल
रहा
है
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Gulfam Ajmeri
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मुहब्बत
से
पहले
हमारी
मुहब्बत
के
चर्चे
हो
जाना
बड़ी
आम
सी
बात
है
इस
मुहब्बत
में
झगड़े
हो
जाना
चला
जाऊँ
मैं
भी
अगर
छोड़
कर
तुम
को
तन्हा
कहीं
पे
तुम्हारा
भी
बनता
है
तुम
भी
किसी
दूसरे
के
हो
जाना
पिता
जी
के
कहने
पे
उस
लड़की
ने
बात
तो
मान
ली
माँ
ये
तो
छोटी
सी
बात
है
ख़ुद-कुशी
जैसे
क़िस्से
हो
जाना
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Gulfam Ajmeri
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