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Govind kumar
dard ke dil men ek ghar banaa liya hota
dard ke dil men ek ghar banaa liya hota | दर्द के दिल में एक घर बना लिया होता
- Govind kumar
दर्द
के
दिल
में
एक
घर
बना
लिया
होता
हाँ
अ
गर
फिर
उसी
से
दिल
लगा
लिया
होता
- Govind kumar
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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मैं
शा'इर
हूँ
मोहब्बत
का
मिरे
दुख
भी
रसीले
हैं
Farhat Abbas Shah
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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दर्द
सहने
का
अलग
अंदाज़
है
जी
रहे
हैं
हम
अदा
की
ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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तुम्हारे
बाद
इस
आँगन
में
फूल
खिलने
पर
ख़ुशी
हुई
भी
तो
ये
दुख
हुआ
कि
दें
किसको
Mohit Dixit
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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कोई
ग़म
न
कोई
फ़साना
समझें
मुझको
अपना
दीवाना
समझें
Govind kumar
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जाँ
जाती
है
दिल
दुखता
है
जब
तुम
सेे
कोई
मिलता
है
मत
कर
अपना
पागल
मुझको
इस
पागल
से
घर
चलता
है
अच्छा
भी
हो
सस्ता
भी
हो
ऐसा
दिल
अब
कम
मिलता
है
तू
ना
कर
अब
वा'दा
हम
सेें
इन
वादों
से
डर
लगता
है
सुन
ओ
दिल
ले
जाने
वाले
तू
मुझको
क़ातिल
लगता
है
अच्छा
ख़ासा
लड़का
है
वो
जाने
सबको
क्यूँ
खलता
है
आ
सकती
हो
अब
भी
वापस
सबको
मौक़ा'
कब
मिलता
है
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Govind kumar
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चेहरे
पे
मायूसी
रखी
मैंने
मगर
चेहरे
से
आगे
कोई
आया
ही
नहीं
Govind kumar
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यार
यारी
का
कोई
मतलब
नहीं
है
यार
जब
यारी
जताने
पे
आ
जाए
Govind kumar
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मैं
कोई
और
था
कहानी
में
कोई
और
था
यार
तेरी
ज़िंदगानी
में
कोई
और
था
Govind kumar
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