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Gaurav Singh
udaasi hai na yaaden hain na tere kaal ka chakkar
udaasi hai na yaaden hain na tere kaal ka chakkar | उदासी है न यादें हैं न तेरे काल का चक्कर
- Gaurav Singh
उदासी
है
न
यादें
हैं
न
तेरे
काल
का
चक्कर
हमारी
शाम
है
जाना
तुम्हारे
शाम
से
बेहतर
- Gaurav Singh
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उस
की
बेचैनी
बढ़ाना
चाहती
हूँ
सुनिए
कह
कर
चुप
लगाना
चाहती
हूँ
Pooja Bhatia
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मेरे
महबूब
मत
बेचैन
होना
तेरे
क़ासिद
ने
ख़त
पहुँचा
दिया
है
Shajar Abbas
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तुम्हारी
एक
हरकत
से
उदासी
आए
चेहरे
पर
किसी
को
इस
तरह
भी
मत
करो
लाचार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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मेरे
कमरे
में
उदासी
है
क़यामत
की
मगर
एक
तस्वीर
पुरानी
सी
हँसा
करती
है
Abbas Qamar
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उदासी
जैसे
कि
उसके
बदन
का
हिस्सा
है
अधूरा
लगता
है
वो
शख़्स
अगर
उदास
न
हो
Vikram Sharma
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बेचैन
फिरता
हूँ
मैं
अक्सर
ख़्वाब
में
होती
नहीं
आबाद
मेरी
नींद
भी
Piyush Mishra 'Aab'
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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ख़ुदा
को
मान
कि
तुझ
लब
के
चूमने
के
सिवा
कोई
इलाज
नहीं
आज
की
उदासी
का
Zafar Iqbal
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हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
Nasir Kazmi
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मैं
वो
नाकाम
मुसव्विर
हूँ
जो
ख़ुद
के
हाथों
एक
उदासी
के
सिवा
कुछ
न
बना
पाया
है
Ashutosh Vdyarthi
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बिछड़ने
वाले
बिछड़
रहे
हैं
मोहब्बतों
का
असर
नहीं
अब
Gaurav Singh
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इजाज़त
हो
सुनाऊँ
यार
ग़ज़लें
बदन
के
ज़ाविये
पर
चार
ग़ज़लें
कई
सौ
शे'र
तन्हा
हो
गए
और
ग़ज़ल
के
नाम
पे
बस
चार
ग़ज़लें
हमारा
काम
अच्छा
चल
रहा
था
हमें
भी
हो
गई
दुश्वार
ग़ज़लें
हमारी
ज़िंदगी
में
यूँँ
समझिए
निभाती
हैं
कई
क़िरदार
ग़ज़लें
लगाते
हैं
अभी
जो
प्यार
की
रट
कहेंगे
एक
दिन
दीं-दार
ग़ज़लें
हुए
हैं
जिसके
चक्कर
में
ग़ज़लगो
उसी
को
लग
रही
बेकार
ग़ज़लें
ग़ज़ल
के
रोग
से
बचकर
के
रहिए
करे
हैं
ठीक
को
बीमार
ग़ज़लें
किसी
के
वास्ते
दरिया
सी
गहरी
किसी
के
वास्ते
पतवार
ग़जलें
हमारी
बात
चाहो
लिख
के
ले
लो
करेंगी
एक
दिन
यलग़ार
ग़ज़लें
अगर
बरसा
सके
हैं
फूल
ग़ज़लें
उठा
सकती
हैं
फिर
तलवार
ग़ज़लें
समझ
आने
लगी
है
धीरे
धीरे
हमें
भी
मीर
की
तहदार
ग़ज़लें
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Gaurav Singh
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हम
भी
तुमको
धोखा
दें
ये
ठीक
नहीं
आँख
के
बदले
आँख
कहाँ
तक
जायज़
है
Gaurav Singh
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जिस्म
का
शौक
पाला
जाता
है
हम
उसी
दौर
में
दीवाने
हैं
Gaurav Singh
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कर
दिया
ना
पागलों
सा
हाल
तेरा
दिल
से
मेरे
खेलते
थे,
हाँ
नहीं
तो
Gaurav Singh
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