ijaazat ho sunaau yaar ghazlen | इजाज़त हो सुनाऊँ यार ग़ज़लें

  - Gaurav Singh
इजाज़तहोसुनाऊँयारग़ज़लें
बदनकेज़ावियेपरचारग़ज़लें
कईसौशे'रतन्हाहोगएऔर
ग़ज़लकेनामपेबसचारग़ज़लें
हमाराकामअच्छाचलरहाथा
हमेंभीहोगईदुश्वारग़ज़लें
हमारीज़िंदगीमेंयूँँसमझिए
निभातीहैंकईक़िरदारग़ज़लें
लगातेहैंअभीजोप्यारकीरट
कहेंगेएकदिनदीं-दारग़ज़लें
हुएहैंजिसकेचक्करमेंग़ज़लगो
उसीकोलगरहीबेकारग़ज़लें
ग़ज़लकेरोगसेबचकरकेरहिए
करेहैंठीककोबीमारग़ज़लें
किसीकेवास्तेदरियासीगहरी
किसीकेवास्तेपतवारग़जलें
हमारीबातचाहोलिखकेलेलो
करेंगीएकदिनयलग़ारग़ज़लें
अगरबरसासकेहैंफूलग़ज़लें
उठासकतीहैंफिरतलवारग़ज़लें
समझआनेलगीहैधीरेधीरे
हमेंभीमीरकीतहदारग़ज़लें
  - Gaurav Singh
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