muflisi ne bachpane ke rang kuchh aise utaare | मुफ़लिसी ने बचपने के रंग कुछ ऐसे उतारे

  - Gaurav Singh
मुफ़लिसीनेबचपनेकेरंगकुछऐसेउतारे
वक़्तकेमारेहुएकंधोंनेफिरबस्तेउतारे
गरज़मानेभरमेंऔरतकीरहेअस्मतसलामत
क्यूँकोईमंटोकिसीकिरदारकेकपड़ेउतारे
सबतवायफ़हैंयहाँऔरयेज़मानाएककोठा
मौतदेखोखड़ीहैद्वारपेकुर्तेउतारे
जंगकाऐलानकरकेख़ुदतोबैठेहैंघरोंमें
जंगमेंमरनेकोराजाजीनेकुछमोह्रेउतारे
बजरहाहैकोईगानाफ़ैज़कालिक्खाहुआऔ'
चलरहेहैंहाइवेपरकारकेशीशेउतारे
  - Gaurav Singh
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