samajh aayenge ik din ham hamaare ghar ke logon ko | समझ आएँगे इक दिन हम हमारे घर के लोगों को

  - Gaurav Singh
समझआएँगेइकदिनहमहमारेघरकेलोगोंको
यहीउम्मीदकाफीहैमेरेलश्करकेलोगोंको
कहानीलिखरहाहूँउर्मिलाकेदुखत्यागोंकी
रुलानाचाहताहूँमैंसभीपत्थरकेलोगोंको
यहीबारिशकिसानोंकीज़रूरतहैमगरप्यारे
डरातीभीयहीबारिशसभीछप्परकेलोगोंको
किसीअपनेसेमिलनेमेंहिचकताहूँजानेक्यूँ
इजाज़तहैमेरेदिलमेंमगरबाहरकेलोगोंको
मुहब्बतकारिहर्सलमुझसेेकरनेवालीलड़कीतुम
अदाकारीदिखातीहोज़मानेभरकेलोगोंको
कईदिनसेपड़ाहूँमैंकिसीकमरेकेकोनेमें
बहानेदेरहाहूँरोज़मैंदफ़्तरकेलोगोंको
उदासीमेंसुनाताहूँजिगरऔरजॉनकीग़ज़लें
कभीबाहरकेलोगोंकोकभीभीतरकेलोगोंको
  - Gaurav Singh
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