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Firdous khan
jale jaate hai ye deepak diwali men ke jaise main
jale jaate hai ye deepak diwali men ke jaise main | जले जाते है ये दीपक दिवाली में के जैसे मैं
- Firdous khan
जले
जाते
है
ये
दीपक
दिवाली
में
के
जैसे
मैं
जली
जाती
हूँ
जब
भी
तुम
दिवाली
पर
नहीं
होते
- Firdous khan
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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उसके
हाथ
में
बाक़ी
क्या
रह
जाता
है
तुमने
जिसका
हाथ
पकड़कर
छोड़
दिया
Vashu Pandey
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आज
तो
दिल
के
दर्द
पर
हँस
कर
दर्द
का
दिल
दुखा
दिया
मैं
ने
Zubair Ali Tabish
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जब
से
वो
समुंदर
पार
गया
गोरी
ने
सँवरना
छोड़
दिया
Bekal Utsahi
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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ख़ुदा
ने
फ़न
दिया
हमको
कि
लड़के
इश्क़
लिखेंगे
ख़ुदा
कब
जानता
था
हम,
ग़ज़ल
में
दर्द
भर
देंगे
Prashant Sharma Daraz
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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तमन्ना
है
दिवाली
में
दिया
इक
जल
उठे
ऐसा
जला
दे
फ़ासले
सारे
हमारे
दरमियाँ
जो
हैं
Bhoomi Srivastava
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दु'आ
करो
कि
सलामत
रहे
मिरी
हिम्मत
ये
इक
चराग़
कई
आँधियों
पे
भारी
है
Waseem Barelvi
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कहा
था
ये
उसने
है
दलदल
उदासी
उसी
से
मिली
फिर
मुसलसल
उदासी
मोहब्बत
की
खुशियाँ
है
उसके
हवाले
मेरे
हिस्से
आई
मुक़म्मल
उदासी
तब्बसुम
मेरे
लब
पे
सिसकी
है
मेरी
मेरी
उजड़ी
आँखों
का
काजल
उदासी
किया
इश्क़
तो
फिर
कफ़ारा
नहीं
कुछ
मोहब्बत
के
मारो
का
है
हल
उदासी
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Firdous khan
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इस
वतन
में
छोटी
सी
बुलबुल
के
हूँ
मानिंद
मैं
मेरा
मज़हब
कुछ
भी
हो
पर
हूँ
तो
सारा
हिंद
मैं
Firdous khan
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मेरे
सब
ग़म
उदासी
दर्द
घबराहट
को
चू
में
है
वो
माथे
से
परेशानी
की
हर
सिलवट
को
चू
में
है
सदा
सुन
कर
तुम्हारे
आने
की
यूँँ
झूम
उठती
है
सो
पगली
जा
के
दरवाज़े
की
हर
खट
खट
को
चू
में
है
तुम्हारे
क़दमों
को
जब
चूमती
हूँ
लगता
है
ऐसा
कोई
जोगन
किसी
दरग़ाह
की
चौखट
को
चू
में
है
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Firdous khan
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यूँँ
तेरी
राह
तकते
तकते
सुन
मेरी
आँखों
में
पड़
गए
जाले
अबके
बारिश
कहीं
मेरी
छत
से
तेरा
एहसास
ही
न
धो
डाले
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Firdous khan
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साॅरी
उसने
मुझे
कहा
है
फिर
यानी
अब
कुछ
तो
हादसा
है
फिर
जिसके
जीने
का
कुछ
इलाज
नहीं
उसको
तो
मौत
ही
दवा
है
फिर
है
तमाशा
ये
ज़िन्दगी
मेरी
तेरा
होना
भी
शो'बदा
है
फिर
वस्ल
का
चश्मदीद
है
तन्हा
ख़ुद-ब-ख़ुद
दीप
जल
गया
है
फिर
कोई
आदम
का
नाम
साथ
नहीं
जी
मेरी
ज़ात
ख़ामख़ा
है
फिर
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Firdous khan
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