koi aisi kahaanii mukammal na ho | कोई ऐसी कहानी मुकम्मल न हो

  - Faisal khan
कोईऐसीकहानीमुकम्मलहो
जिसकेआख़िरमेंकोईभीपागलहो
ख़ौफ़आनेलगाहैमुझेदश्तमें
अबतोबसनेकोसहराहोजंगलहो
मैंनेपूछायहाँक्यूँँयेख़े
मेंलगे
फिरयेसोचाकिशायदयाँहोटलहो
बातकरयूँँइशारेसेजिससेेतेरा
कामसारानिकलजाए,हलचलहो
उनकीगुज़रीहैहररातबसख़ौफ़में
जिनकेदरपेलगानेकोअरगलहो
हैंतलबगारसबदाद-ओ-तहसीनके
येवहीहैंकिदिलजिनकेकोमलहो
वोक़बीलाबिखरजाएजिस
मेंकोई
अद्ल-ओ-इंसाफकरनेकोफ़ैसलहो
  - Faisal khan
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