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Yash Sharma
maa mujhe jab bulaati hai yaaro
maa mujhe jab bulaati hai yaaro | माँ मुझे जब बुलाती है यारो
- Yash Sharma
माँ
मुझे
जब
बुलाती
है
यारो
आह
दिल
चीर
जाती
है
यारो
कहते
हैं
शा'इरी
छोड़
दे
तू
तब
ग़ज़ल
और
आती
है
यारो
ज़िंदगी
दोस्ती
आशिक़ी
भी
सिर्फ़
मुश्किल
बढ़ाती
है
यारो
क्या
ग़ज़ब
रौशनी
है
ग़ज़ल
में
ज़िंदगी
ये
दिखाती
है
यारो
ये
नई
बात
दिल
पे
लगी
है
वो
हमें
अब
भुलाती
है
यारो
- Yash Sharma
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आह
को
चाहिए
इक
उम्र
असर
होने
तक
कौन
जीता
है
तिरी
ज़ुल्फ़
के
सर
होने
तक
Mirza Ghalib
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मुझे
बातें
नहीं
तेरी
मोहब्बत
चाहिए
थी
मुझे
अफ़सोस
है
ये
मुझको
कहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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हम
आह
भी
करते
हैं
तो
हो
जाते
हैं
बदनाम
वो
क़त्ल
भी
करते
हैं
तो
चर्चा
नहीं
होता
Akbar Allahabadi
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अफ़सोस
हो
रहा
है
तेरी
शक्ल
देख
कर
क्या
कोई
तेरा
चाहने
वाला
नहीं
रहा
Abbas Tabish
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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सदा
लपेट
के
दिल
जाएँगे
वगरना
नहीं
पहाड़
आह
से
हिल
जाएँगे
वगरना
नहीं
वो
आज
दरिया
से
लड़ने
की
ठान
कर
गए
थे
कहीं
किनारे
पे
मिल
जाएँगे
वगरना
नहीं
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Nadeem Bhabha
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मुँह
ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द
ओ
लब-ए-ख़ुश्क
ओ
चश्म-ए-तर
सच्ची
जो
दिल-लगी
है
तो
क्या
क्या
गवाह
है
Nazeer Akbarabadi
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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क्या
ग़लत-फ़हमी
में
रह
जाने
का
सदमा
कुछ
नहीं
वो
मुझे
समझा
तो
सकता
था
कि
ऐसा
कुछ
नहीं
इश्क़
से
बच
कर
भी
बंदा
कुछ
नहीं
होता
मगर
ये
भी
सच
है
इश्क़
में
बंदे
का
बचता
कुछ
नहीं
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Tehzeeb Hafi
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काफ़ी
पत्थर
हैं
मेरी
राहों
में
पुख़्तगी
है
मगर
इरादों
में
वो
जो
लड़की
निखारती
थी
मुझे
ज़िंदगी
भर
रहेगी
यादों
में
मुझको
ठगने
में
गाली
देने
में
यार
शामिल
हैं
इन
गुनाहों
में
बात
जो
मुझ
सेे
अब
नहीं
करते
कोसते
होंगे
ख़ुद
को
रातों
में
मिट
गया
है
मिटाने
वाला
मुझे
कोई
कहता
है
मेरे
कानों
में
बस
उन्हें
ग़ज़लें
रास
आती
हैं
इसलिए
हूॅं
मैं
उनकी
आँखों
में
थोड़ी
बारिश
भी
हो
रही
थी
जब
हाथ
मेरा
था
तेरे
हाथों
में
वो
मेरी
नींद
छीन
लेती
हैं
कोई
जादू
है
तेरी
आहों
में
उस
सेे
जब
भी
मिलो
तो
ये
कहना
'यश'
को
सोना
था
उसकी
बाहों
में
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Yash Sharma
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यार
हमको
मत
कहो
तुम
हम
अगर
नाराज़
हैं
हम
अगर
नाराज़
हैं
तो
हम
कहाँ
दम-साज़
हैं
Yash Sharma
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देखते
हैं
हम
भी
सपने
दोस्तो
थोड़े
सच्चे
थोड़े
कच्चे
दोस्तो
वो
सभी
कुछ
सच
बताता
है
हमें
आइना
डरता
है
किस
से
दोस्तो
हर
गए
दिन
देख
कर
घर
में
कलह
डर
गए
हैं
घर
में
बच्चे
दोस्तो
आए
हैं
दामाद
जी
जबसे
यहाँ
हो
रहे
हैं
घर
में
झगड़े
दोस्तो
मुफ़लिसी
के
दौर
में
थे
जब
भी
हम
दूर
थे
सब
यार
अपने
दोस्तो
जब
से
वो
मेरी
ग़ज़ल
में
आई
है
करते
हैं
सब
उसके
चर्चे
दोस्तो
उसके
घर
क्यूँ
आज
कल
जाते
नहीं
कहते
हैं
ये
'यश'
से
रस्ते
दोस्तो
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Yash Sharma
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तुम
सेे
मिलकर
पता
चला
मुझको
वास्तव
में
फ़रिश्ते
होते
हैं
Yash Sharma
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तुम
जुदाई
की
बात
मत
करना
बे-वफ़ाई
की
बात
मत
करना
यार
है
वो
तुम्हारा
पर
उस
सेे
तुम
सगाई
की
बात
मत
करना
मेरे
आग़ोश
में
तू
रहती
है
तू
रज़ाई
की
बात
मत
करना
कोरा
काग़ज़
ही
मुझको
भाता
है
रौशनाई
की
बात
मत
करना
उसके
गंदे
ख़याल
अच्छे
हैं
तुम
सफ़ाई
की
बात
मत
करना
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