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Yash Sharma
tum judaai kii baat mat karna
tum judaai kii baat mat karna | तुम जुदाई की बात मत करना
- Yash Sharma
तुम
जुदाई
की
बात
मत
करना
बे-वफ़ाई
की
बात
मत
करना
यार
है
वो
तुम्हारा
पर
उस
सेे
तुम
सगाई
की
बात
मत
करना
मेरे
आग़ोश
में
तू
रहती
है
तू
रज़ाई
की
बात
मत
करना
कोरा
काग़ज़
ही
मुझको
भाता
है
रौशनाई
की
बात
मत
करना
उसके
गंदे
ख़याल
अच्छे
हैं
तुम
सफ़ाई
की
बात
मत
करना
- Yash Sharma
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सुनो
हर-वक़्त
इतना
याद
भी
मत
कीजिए
हमको
कहीं
ऐसा
न
हो
की
हिचकियों
में
जाँ
निकल
जाए
Sandeep dabral 'sendy'
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है
दु'आ
याद
मगर
हर्फ़-ए-दुआ
याद
नहीं
मेरे
नग़्मात
को
अंदाज़-ए-नवा
याद
नहीं
Saghar Siddiqui
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इक
अजब
हाल
है
कि
अब
उस
को
याद
करना
भी
बे-वफ़ाई
है
Jaun Elia
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आज
फिर
नींद
को
आँखों
से
बिछड़ते
देखा
आज
फिर
याद
कोई
चोट
पुरानी
आई
Iqbal Ashhar
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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बिछड़
गया
हूँ
मगर
याद
करता
रहता
हूँ
किताब
छोड़
चुका
हूँ
पढ़ाई
जारी
है
Ali Zaryoun
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बस
ये
दिक़्क़त
है
भुलाने
में
उसे
उसके
बदले
में
किस
को
याद
करें
Fahmi Badayuni
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तेरा
बनता
था
कि
तू
दुश्मन
हो
अपने
हाथों
से
खिलाया
था
तुझे
तेरी
गाली
से
मुझे
याद
आया
कितने
तानों
से
बचाया
था
तुझे
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Ali Zaryoun
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भूलना
चाहा
अगर
उस
को
कभी
और
भी
वो
याद
आया
देर
तक
Nawaz Deobandi
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ख़ुदा
ने
यह
सिफ़त
दुनिया
की
हर
औरत
को
बख़्शी
है
कि
वो
पागल
भी
हो
जाए
तो
बेटे
याद
रहते
हैं
Munawwar Rana
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देखते
हैं
हम
भी
सपने
दोस्तो
थोड़े
सच्चे
थोड़े
कच्चे
दोस्तो
वो
सभी
कुछ
सच
बताता
है
हमें
आइना
डरता
है
किस
से
दोस्तो
हर
गए
दिन
देख
कर
घर
में
कलह
डर
गए
हैं
घर
में
बच्चे
दोस्तो
आए
हैं
दामाद
जी
जबसे
यहाँ
हो
रहे
हैं
घर
में
झगड़े
दोस्तो
मुफ़लिसी
के
दौर
में
थे
जब
भी
हम
दूर
थे
सब
यार
अपने
दोस्तो
जब
से
वो
मेरी
ग़ज़ल
में
आई
है
करते
हैं
सब
उसके
चर्चे
दोस्तो
उसके
घर
क्यूँ
आज
कल
जाते
नहीं
कहते
हैं
ये
'यश'
से
रस्ते
दोस्तो
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Yash Sharma
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एक
पल
में
रूठ
जाना
यार
का
ये
वही
क़िस्सा
है
पहले
प्यार
का
छैयाँ
छैयाँ
या
हो
बीड़ी
की
जलन
ख़ूब
है
अंदाज़
ये
गुलज़ार
का
थक
गए
हैं
काम
करते
करते
हम
आए
अब
जल्दी
से
दिन
इतवार
का
रहते
हैं
माता
पिता
के
साथ
हम
सो
हमें
ख़तरा
नहीं
है
ख़ार
का
सच्चे
लोगों
के
लिए
हैं
गालियाँ
क्या
यही
दस्तूर
है
संसार
का
मान
लेगा
वो
तुम्हें
अपना
ख़ुदा
हाल
मत
पूछो
कभी
बीमार
का
शहर
छोड़ा
है
ये
जब
से
यार
ने
दाम
सस्ता
हो
गया
बाज़ार
का
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Yash Sharma
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यार
हमको
मत
कहो
तुम
हम
अगर
नाराज़
हैं
हम
अगर
नाराज़
हैं
तो
हम
कहाँ
दम-साज़
हैं
Yash Sharma
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पूछता
है
ये
रास्ता
मुझ
सेे
बात
क्या
है
तू
रोज़
आता
है
Yash Sharma
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काफ़ी
पत्थर
हैं
मेरी
राहों
में
पुख़्तगी
है
मगर
इरादों
में
वो
जो
लड़की
निखारती
थी
मुझे
ज़िंदगी
भर
रहेगी
यादों
में
मुझको
ठगने
में
गाली
देने
में
यार
शामिल
हैं
इन
गुनाहों
में
बात
जो
मुझ
सेे
अब
नहीं
करते
कोसते
होंगे
ख़ुद
को
रातों
में
मिट
गया
है
मिटाने
वाला
मुझे
कोई
कहता
है
मेरे
कानों
में
बस
उन्हें
ग़ज़लें
रास
आती
हैं
इसलिए
हूॅं
मैं
उनकी
आँखों
में
थोड़ी
बारिश
भी
हो
रही
थी
जब
हाथ
मेरा
था
तेरे
हाथों
में
वो
मेरी
नींद
छीन
लेती
हैं
कोई
जादू
है
तेरी
आहों
में
उस
सेे
जब
भी
मिलो
तो
ये
कहना
'यश'
को
सोना
था
उसकी
बाहों
में
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Yash Sharma
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