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Dileep Kumar
wahin rishte khare maaloom hote hain
wahin rishte khare maaloom hote hain | वहीं रिश्ते खरे मालूम होते हैं
- Dileep Kumar
वहीं
रिश्ते
खरे
मालूम
होते
हैं
ज़रा
सी
भूल
से
जो
टूट
जाते
हैं
- Dileep Kumar
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याद
भूले
हुए
लोगों
को
किया
जाता
है
भूल
जाओ
कि
तुम्हें
याद
किया
जाएगा
Charagh Sharma
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मैं
भूल
जाऊँ
तुम्हें
अब
यही
मुनासिब
है
मगर
भुलाना
भी
चाहूँ
तो
किस
तरह
भूलूँ
Javed Akhtar
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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मैं
जिसे
ओढ़ता
बिछाता
हूँ
वो
ग़ज़ल
आप
को
सुनाता
हूँ
एक
जंगल
है
तेरी
आँखों
में
मैं
जहाँ
राह
भूल
जाता
हूँ
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Dushyant Kumar
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कुछ
बता
तू
ही
नशेमन
का
पता
मैं
तो
ऐ
बाद-ए-सबा
भूल
गया
Majrooh Sultanpuri
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हमने
सब
सीखा
था
उसके
ख़ातिर
बस
भूल
उसे
ख़ुद
जीना
सीख
नहीं
पाए
Surya Tiwari
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जमाना
भूल
पायेगा
नहीं
अपनी
मुहब्बत
छपेंगे
क्लास
दसवीं
में
सभी
किस्से
हमारे
Shubham Seth
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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एक
तो
कुछ
भी
कहा
जाता
नहीं
और
फिर
चुप
भी
रहा
जाता
नहीं
इसलिए
भी
माफ़
कर
देता
है
वो
दरमियाँ
कुछ
हो,
सहा
जाता
नहीं
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Dileep Kumar
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ये
सानेहा
भी
एक
दिन
होना
ही
था
इक
रोज़
पाकर
भी
उसे
खोना
ही
था
हम
हो
गए
हैं
गर
जुदा
तो
सोग
क्यूँ
जब
साथ
होकर
भी
हमें
रोना
ही
था
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Dileep Kumar
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जिन्हें
बे-हिसी
का
ज़रा
भी
पता
नइँ
उन्हें
ज़िंदगी
का
ज़रा
भी
पता
नइँ
मिरी
दोस्ती
की
हदें
जानता
है
मिरी
दुश्मनी
का
ज़रा
भी
पता
नइँ
मोहब्बत
में
कान्हा
तो
तुम
बन
गए
हो
मगर
रुक्मणी
का
ज़रा
भी
पता
नइँ
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Dileep Kumar
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हमारे
इश्क़
की
इतनी
सी
क़ीमत
है
जहाँ
भर
की,
हमारे
साथ
ज़िल्लत
है
खड़े
हैं
दूर
तुझ
सेे
तेरी
महफ़िल
में
ख़ुदा
की
देख
हम
पे
कितनी
रहमत
है
हमारी
रातें
भी
उजड़ी
हुई
सी
है
चराग़ों
से
हमें
भी
थोड़ी
नफ़रत
है
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Dileep Kumar
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हम
लोग
हाल-ए-ज़ार
के
मारे
हुए
छत
पर
खड़े
हैं
अब
थके-हारे
हुए
Dileep Kumar
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