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Dileep Kumar
har kisi ko yaad dilbar ki sataaye
har kisi ko yaad dilbar ki sataaye | हर किसी को याद दिलबर की सताए
- Dileep Kumar
हर
किसी
को
याद
दिलबर
की
सताए
कोई
रोना
चाहे
तो
रो
भी
न
पाए
महज़
इक
उस
शख़्स
की
ख़ातिर
मैं
ने
यार
जाने
अनजाने
में
कितने
दिल
दुखाए
शे'र
अपने
तो
सुनाते
हैं
सभी
ही
कोई
हो
जो
मीर
की
ग़ज़लें
सुनाए
दास्ताँ
ही
जब
अधूरी
है
किसी
की
फिर
तुझे
वो
क्या
बताए
क्या
छुपाए
इश्क़
से
कुछ
यूँँ
भरोसा
उठ
गया
है
और
कोई
भी
न
अब
इस
दिल
को
भाए
- Dileep Kumar
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किस
तरह
मेरी
जान
ये
किरदार
बने
है
जो
तुझ
सेे
मिले
है
वो
तेरा
यार
बने
है
Vikram Gaur Vairagi
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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इस
का
अपनी
ही
रवानी
पर
नहीं
है
इख़्तियार
ज़िंदगी
शिव
की
जटाओं
में
है
गंगा
की
तरह
Ayush Charagh
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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तुझे
छूकर
अभी
तक
होश
में
हूँ
कमी
कोई
कहीं
तो
रह
गई
है
Abhay Mishra
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बाग़बाँ
हम
तो
इस
ख़याल
के
हैं
देख
लो
फूल
फूल
तोड़ो
मत
Jaun Elia
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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ये
काम
दोनों
तरफ़
हुआ
है
उसे
भी
आदत
पड़ी
है
मेरी
Shariq Kaifi
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कोई
इक
भी
जब
न
मेहमाँ
पाया
हमने
फिर
तो
अपना
घर
ही
वीराँ
पाया
हमने
यूँँ
लगा
जैसे
बिछड़
के
ख़ुश
बहुत
हैं
देखा
तो
ख़ुद
को
पशेमाँ
पाया
हमने
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Dileep Kumar
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जब
जब
ये
दिल
बंजर
कम
लगता
है
मुझको
अपना
ही
घर
कम
लगता
है
जब
से
मैं
ने
तेरी
आँखें
देखी
मुझको
तेरा
पैकर
कम
लगता
है
हर
इक
को
रस्ता
समझाने
वाले
तू
सब
को
ही
रहबर
कम
लगता
है
मुख़्बर
का
इक
ये
भी
फ़न
होता
है
मुख़्बर
सबको
मुख़्बर
कम
लगता
है
अपने
अफ़साने
शाबाशी
लूटे
हम-सर
का
हर
मंज़र
कम
लगता
है
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Dileep Kumar
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हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरा
कोई
वजह
है
Dileep Kumar
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और
तो
न
देंगे
कोई
दलील
जान-ए-मन
ये
मु'आमला
भी
हम
छोड़ते
हैं
अब
तुम
पर
Dileep Kumar
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काश!
तुम
पहले
मुकम्मल
बात
करते
और
फिर
मुझ
सेे
मुसलसल
बात
करते
Dileep Kumar
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