vo dikhaava saamne anjaan ke kar hi raha hai | वो दिखावा सामने अनजान के कर ही रहा है

  - "Dharam" Barot
वोदिखावासामनेअनजानकेकरहीरहाहै
इनदिखावोंमेंहीमध्यमवर्गतोमरहीरहाहै
शहरमेंगावोंसेसारेलोगऐसेरहेहै
गाँवमेंतोसिर्फ़अबजर्जरसायेघरहीरहाहै
बापकाथादर्दसमझाहीनहींअय्याशबेटा
बापकोतोमारकरअबब्याजवोभरहीरहाहै
ज़ख़्मकाहैदर्दजोमहसूसकरनाहैतुझेही
औरोंकोलगतायहीहैघावतोभरहीरहाहै
अपनीवोआवाज़गैरोपरउठाताज़ोरसेहै
ग़लतीहोअपनोसेफिरतोपुतलाबनकरहीरहाहै
  - "Dharam" Barot
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