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"Dharam" Barot
karne par bhi yaad kuchh aata nahin
karne par bhi yaad kuchh aata nahin | करने पर भी याद कुछ आता नहीं
- "Dharam" Barot
करने
पर
भी
याद
कुछ
आता
नहीं
भूल
कर
भी
भूल
मैं
पाता
नहीं
आपने
मौक़ा
दिया
था
छोड़
दो
छोड़
कर
क्यूँ
आपको
जाता
नहीं
आप
ही
हो
इक
मुझे
जो
जानते
आप
से
ही
क्यूँ
कोई
नाता
नहीं
इक
तरफ़
कुछ
भी
नहीं
था
चाहिए
रंज
रहता
इक
तरफ़
लाता
नहीं
सुर
मेरे
बिल्कुल
नहीं
वश
में
मेरे
सो
तरन्नुम
से
अभी
नाता
नहीं
कोशिशों
से
आपकी
क़ाबिल
बना
मत
कहें
ये
आप
कुछ
आता
नहीं
- "Dharam" Barot
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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ख़ुदा
ने
फ़न
दिया
हमको
कि
लड़के
इश्क़
लिखेंगे
ख़ुदा
कब
जानता
था
हम,
ग़ज़ल
में
दर्द
भर
देंगे
Prashant Sharma Daraz
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ये
इंतिज़ार
सहर
का
था
या
तुम्हारा
था
दिया
जलाया
भी
मैं
ने
दिया
बुझाया
भी
Aanis Moin
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दु'आ
करो
कि
सलामत
रहे
मिरी
हिम्मत
ये
इक
चराग़
कई
आँधियों
पे
भारी
है
Waseem Barelvi
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कहाँ
चराग़
जलाएँ
कहाँ
गुलाब
रखें
छतें
तो
मिलती
हैं
लेकिन
मकाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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उसने
हम
सेे
बातें
करना
छोड़
दिया
माँ
की
जिस
सेे
बात
कराने
वाले
थे
Tanoj Dadhich
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उसने
गले
से
हमको
लगाया
तो
रो
पड़े
अपना
बना
के
हाथ
छुड़ाया
तो
रो
पड़े
मैंने
ग़मों
से
कह
तो
दिया
रहना
उम्र
भर
वा'दा
ग़मों
ने
अपना
निभाया
तो
रो
पड़े
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Vikas Sahaj
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तेरी
हर
बात
मोहब्बत
में
गवारा
कर
के
दिल
के
बाज़ार
में
बैठे
हैं
ख़सारा
कर
के
आसमानों
की
तरफ़
फेंक
दिया
है
मैं
ने
चंद
मिट्टी
के
चराग़ों
को
सितारा
कर
के
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Rahat Indori
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एक
परिन्दे
का
घर
उजाड़
दिया
किसी
ने
बस
बच्चों
के
इक
दिन
के
झूले
की
ख़ातिर
Pankaj murenvi
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बीस
बरस
से
इक
तारे
पर
मन
की
जोत
जगाता
हूँ
दीवाली
की
रात
को
तू
भी
कोई
दिया
जलाया
कर
Majid Ul Baqri
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आप
आगे
बढ़
रहे
हो
है
सही
सीखना
होता
ग़लत
कैसे
मेरा
"Dharam" Barot
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भावना
कर
ले
अगर
वश
धर्म
हे
तू
रास्ता
अमृत
फ़क़त
ये
देख
ले
तू
"Dharam" Barot
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पेड़
पे
रह
लू
या
पिंजरे
में
रहूँ
मैं
साथ
तेरा
गर
मिले
सब
कुछ
सहूँ
मैं
कोई
भी
मेरा
न
था
आगे
न
होगा
एक
तू
ही
है
जिसे
अपना
कहूँ
मैं
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"Dharam" Barot
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औरों
ने
जी
भर
किया
बर्बाद
मुझको
आप
ही
से
होना
था
आबाद
मुझको
हिज्र
का
कोई
इरादा
भी
नहीं
है
क़ैद
करके
मत
करे
आज़ाद
मुझको
बंदगी
इक
नाम
की
करता
रहूँगा
इश्क़
में
इक
दिन
मिलेगी
दाद
मुझको
वास्ते
हाज़िर
रहूँगा
आप
के
मैं
आप
कर
सकते
कभी
भी
याद
मुझको
मेरी
ग़ज़लों
को
जभी
वो
गुनगुनाती
लग
रहा
था
दे
रही
है
साद
मुझको
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"Dharam" Barot
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कमज़ोर
हैं
आँखें
मेरी
दिखती
मुझे
है
वो
फ़क़त
"Dharam" Barot
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