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"Dharam" Barot
chaand par ghar kyuuñ ban
chaand par ghar kyuuñ ban | चाँद पर घर क्यूँ बनाना बात ये थी
- "Dharam" Barot
चाँद
पर
घर
क्यूँ
बनाना
बात
ये
थी
क्या
अमीरी
को
दिखाना
बात
ये
थी
टेक्नोलॉजी
के
अपने
फ़ायदे
हैं
दूसरों
को
था
झुकाना
बात
ये
थी
काम
अच्छा
था
अधूरा
रह
गया
यार
बिछड़ों
को
कैसे
मिलाना
बात
ये
थी
थी
कमी
पैसों
की
ये
सबने
सुना
है
काम
का
था
चार
आना
बात
ये
थी
मिलने
को
तो
और
भी
मिल
जाने
थे
पर
ग़म
उसे
मेरा
मनाना
बात
ये
थी
मुश्किलें
आई
कई
पर
पार
कर
ली
रिश्ता
सच
में
था
निभाना
बात
ये
थी
- "Dharam" Barot
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दुआए
मांगते
हैं
इसीलिए
अपने
उजड़ने
की
हमें
तो
यार
तेरे
हाथ
से
तामीर
होना
हैं
Vishal Bagh
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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दाग़
दुनिया
ने
दिए
ज़ख़्म
ज़माने
से
मिले
हम
को
तोहफ़े
ये
तुम्हें
दोस्त
बनाने
से
मिले
Kaif Bhopali
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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कोई
दिक़्क़त
नहीं
है
गर
तुम्हें
उलझा
सा
लगता
हूँ
मैं
पहली
मर्तबा
मिलने
में
सबको
ऐसा
लगता
हूँ
ज़रूरी
तो
नहीं
हम
साथ
हैं
तो
कोई
चक्कर
हो
वो
मेरी
दोस्त
है
और
मैं
उसे
बस
अच्छा
लगता
हूँ
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Ali Zaryoun
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जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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जैसे
पतवार
सफ़ीने
के
लिए
होते
हैं
दोस्त
अहबाब
तो
जीने
के
लिए
होते
हैं
इश्क़
में
कोई
तमाशा
नहीं
करना
होता
अश्क
जैसे
भी
हों
पीने
के
लिए
होते
हैं
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Khalid Nadeem Shani
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मुझे
अब
याद
भी
आती
नहीं
है
वो
दिल
में
मेरे
अब
यानी
नहीं
है
वो
मेरी
इतनी
दीवानी
नहीं
है
सो
मेरे
मन
की
वो
रानी
नहीं
है
ज़माना
अब
है
ओटीटी
का
यारों
कहानी
बैन
अब
होनी
नहीं
है
हुनर
चुप
रहने
का
सीखा
था
जब
से
तभी
से
दुश्मनी
होती
नहीं
है
सभी
को
होता
ईगो
चाहिए
भी
किसी
की
बात
फिर
मानी
नहीं
है
उसी
की
मर्ज़ी
से
सब
हो
रहा
था
हमारी
कामयाबी
भी
नहीं
है
जो
लड़की
यार
दुनिया
से
जुदा
हो
वो
लड़की
हाथ
फिर
आनी
नहीं
है
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"Dharam" Barot
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मैं
नेता
सैलरी
भी
दान
कर
देता
लिए
बिन
सैलरी
घर
अपना
भर
देता
मेरा
क्या
है
हूँ
मैं
इक
आम
सा
इंसान
मुझे
इन
सब
से
क्या
मैं
सिर्फ़
कर
देता
दिए
मैंने
थे
जितनी
बार
जाकर
वोट
नया
क्या
धरम
या
फिर
जात
पर
देता
तुझे
बदलाव
लाना
है
मगर
तू
भी
इमोशन
से
धरम
सच
झूठ
कर
देता
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"Dharam" Barot
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आखरी
रास्ता
ढूँढ़ना
है
हमें
आखरी
रास्ता
ढूँढ़ता
है
हमें
"Dharam" Barot
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मोर्चा
हमने
सँभाला
है
ये
भी
इक
वहम
था
खेल
हर
दिन
ही
पलट
देता
खिलाड़ी
इक
नया
"Dharam" Barot
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दिया
है
घाव
पर
अच्छा
लगा
था
लिया
था
मान
तो
बोसा
लगा
था
बहानेबाज़
करता
था
बहाने
था
झूठा
पर
मुझे
सच्चा
लगा
था
न
जाने
खेल
क्या
क्या
जानती
थी
खिलाड़ी
भी
उसे
कच्चा
लगा
था
चला
था
छोड़
कर
मँझधार
पर
साथ
सिखाया
तैरना
ऐसा
लगा
था
बुराई
सामने
कर
दी
थी
मैंने
बताए
आपको
कैसा
लगा
था
उड़े
थे
होश
आईना
भी
तोड़ा
धरम
ख़ुद
को
बुरा
इतना
लगा
था
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