hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Dharamraj deshraj
tazurba ye hua hai zindagi meinna hota koi apna muflisi men
tazurba ye hua hai zindagi meinna hota koi apna muflisi men | तज़ुर्बा ये हुआ है ज़िन्दगी में
- Dharamraj deshraj
तज़ुर्बा
ये
हुआ
है
ज़िन्दगी
में
न
होता
कोई
अपना
मुफ़लिसी
में
ज़ुबाँ
ज़ख़्मों
को
मेरे
मिल
गई
है
उन्हें
शामिल
किया
जब
शा'इरी
में
ग़ज़ब
का
दिल
बनाया
है
ख़ुदा
ने
छलक
पड़ते
हैं
आँसू
भी
ख़ुशी
में
ख़ुशी
का
एक
लम्हा
कीमती
है
हज़ारों
ग़म
हैं
लेकिन
ज़िन्दगी
में
बुरा
हूँ
मैं
मुझे
अच्छा
कहा
है
शराबी
ने
यक़ीनन
बेख़ुदी
में
मुझे
हँसता
हुआ
देखा
तो
कहते
वो
कोई
तो
बात
है
इस
आदमी
में
मेरे
रब
मुझको
ये
तौफ़ीक़
दे
दे
रहूँ
हँसता
सदा
ग़म
और
ख़ुशी
में
- Dharamraj deshraj
Download Sher Image
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
101 Likes
जो
चुप-चाप
रहती
थी
दीवार
पर
वो
तस्वीर
बातें
बनाने
लगी
Adil Mansuri
Send
Download Image
32 Likes
उसे
किसी
से
मोहब्बत
थी
और
वो
मैं
नहीं
था
ये
बात
मुझ
सेे
ज़ियादा
उसे
रुलाती
थी
Ali Zaryoun
Send
Download Image
360 Likes
जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
Ada Jafarey
Send
Download Image
30 Likes
तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
बात
ऐसी
भी
भला
आप
में
क्या
रक्खी
है
इक
दिवाने
ने
ज़मीं
सर
पे
उठा
रक्खी
है
इत्तिफ़ाक़न
कहीं
मिल
जाए
तो
कहना
उस
सेे
तेरे
शाइर
ने
बड़ी
धूम
मचा
रक्खी
है
Read Full
Ismail Raaz
Send
Download Image
63 Likes
तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
Read Full
Dev Niranjan
Send
Download Image
35 Likes
जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
Send
Download Image
4 Likes
हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
Read Full
Send
Download Image
2 Likes
सोच
समझ
कर
देख
लिया
है
क्या
बोलूँ
तुझ
को
तो
हर
बात
बुरी
लग
जाती
है
Sohil Barelvi
Send
Download Image
1 Like
Read More
दिल
किसी
से
लगाना
नहीं
है
आँसुओं
में
नहाना
नहीं
है
अब
तो
तालीम
तहज़ीब
की
हो
अब
पुराना
ज़माना
नहीं
है
जो
भी
करना
हो
वो
आज
कर
लो
ज़िन्दगी
का
ठिकाना
नहीं
है
पूछते
ख़्वाब
में
क्यूँ
न
आए
पास
मेरे
बहाना
नहीं
है
चार
कांधे
भले
मिल
भी
जाएँ
पर
सफ़र
ये
सुहाना
नहीं
है
वक़्त
ठोकर
किसे
कब
लगा
दे
वक़्त
का
तो
ठिकाना
नहीं
है
बख़्त
रूठा
रहा
उम्र
बीती
क्यूँ
'धरम'
हमने
जाना
नहीं
है
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
1 Like
ख़ुदास
देखिये
फ़रियाद
करके
सुकूँ
दिल
को
मिलेगा
याद
करके
ग़मों
से
अपना
दिल
आबाद
करके
मज़ा
आने
लगा
रूदाद
करके
दुआएँ
पुरअसर
हमको
मिलेंगी
किसी
मज़लूम
की
इमदाद
करके
बिमारी
भूलने
की
छोड़
भी
जा
भुला
देना
हमें
तू
याद
करके
लहू
आँखों
का
गंगाजल
लगेगा
कभी
देखो
उसे
आज़ाद
करके
हमारे
पास
है
ग़म
का
ख़ज़ाना
मिलेगा
क्या
हमें
बर्बाद
करके
'धरम'सुख
चीज़
क्या
है
देख
लेना
दिले-नाक़ाम
को
तू
शाद
करके
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
1 Like
जाते-जाते
वो
निशानी
दे
गया
मेरे
ज़ख़्मों
को
जवानी
दे
गया
साथ
उसके
ही
गईं
सारी
ख़ुशी
मेरे
अश्क़ों
को
रवानी
दे
गया
शुक्रिया
सौ
मर्तबा
उस
यार
का
ज़ीस्त
को
मेरे
जो
मानी
दे
गया
वक़्त
बेहद
ही
बुरा
जाते
हुए
बरक़तें
पर
आसमानी
दे
गया
यूँँ
जिओ
मरने
पे
दुनियाँ
ये
कहे
मौत
को
भी
ज़िंदगानी
दे
गया
ख्बाब
ख़ुशियों
का
भला
आया
मुझे
याद
कुछ
अपनी
सुहानी
दे
गया
बाद
मरने
के
जहाँ
बोले
'धरम'
अपने
ग़म
की
तर्जुमानी
दे
गया
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
3 Likes
नज़र
से
पिलाई
कहा
कुछ
नहीं
नशा
फिर
भी
यारों
हुआ
कुछ
नहीं
लिया
कुछ
नहीं
और
दिया
कुछ
नहीं
कहाँ
खो
गया
दिल
पता
कुछ
नहीं
ख़फ़ा
हो
तो
बेशक
मिरी
जान
लो
तग़ाफुल
से
बढ़कर
बुरा
कुछ
नहीं
भला
हूँ
बुरा
हूँ
पता
है
उसे
मिरे
रब
से
आख़िर
छुपा
कुछ
नहीं
असर
हो
दवा
में
तो
हो
किस
तरह
अगर
साथ
में
हो
दु'आ
कुछ
नहीं
फ़क़त
उनका
ख़्वाबों
में
बोसा
लिया
बहुत
कुछ
हुआ
और
हुआ
कुछ
नहीं
रहे
या
मिटे
बादशाहत
'धरम'
करे
जो
किसी
का
भला
कुछ
नहीं
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
1 Like
मेरा
दुश्मन
मुझी
को
भूल
गया
प्यार
में
दुश्मनी
को
भूल
गया
आज
के
दौर
की
हक़ीक़त
है
आदमी,
आदमी
को
भूल
गया
तुमको
दिल
में
बिठा
लिया
जब
से
मैं
तुम्हारी
कमी
को
भूल
गया
ज़िन्दगी
क्या
है
जब
से
जाना
है
दर्द-ओ-ग़म
और
ख़ुशी
को
भूल
गया
खाई
जब
से
क़सम
न
पीने
की
भूल
से
मयकशी
को
भूल
गया
रब
ने
क्या
कुछ
नहीं
दिया
मुझको
उसकी
दरिया
दिली
को
भूल
गया
यार
दौलत
ग़मों
की
दे
मुझको
क्या
मिरी
मुफ़लिसी
को
भूल
गया
Read Full
Dharamraj deshraj
Download Image
1 Like
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Sach Shayari
Aansoo Shayari
Kitaaben Shayari
Phool Shayari
Qasid Shayari