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Dharamraj deshraj
tu nahin gham bhi teraa pyaara hai
tu nahin gham bhi teraa pyaara hai | तू नहीं ग़म भी तेरा प्यारा है
- Dharamraj deshraj
तू
नहीं
ग़म
भी
तेरा
प्यारा
है
सिर्फ़
कह
दे
कि
तू
हमारा
है
मौत
का
भी
नहीं
रहा
है
डर
दर्दोग़म
ने
हमें
निख़ारा
है
आपसे
इश्क़
हो
गया
शायद
आपका
हर
सितम
गवारा
है
ज़ीस्त
का
क्या
हिसाब
दूँ
यारों
वक़्त
गुज़रा
नहीं
गुज़ारा
है
ज़ख़्म
पाकर
भी
ख़ुश
हुआ
यारो
ज़ख़्म
ने
ज़िस्म
को
निखारा
है
मुझको
ग़म
में
सिखा
दिया
रोना
यार
एहसान
सब
तुम्हारा
है
हुक्म
पाते
ही
चल
दिया
इन्साँ
आसमानों
ने
जब
पुकारा
है
- Dharamraj deshraj
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यहाँ
मौत
का
ख़ौफ़
कुछ
यूँँ
है
सबको
कि
जीने
की
ख़ातिर
मरे
जा
रहे
हैं
Sapna Moolchandani
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ज़िंदगी
और
चल
नहीं
सकती
आने
पे
मौत
टल
नहीं
सकती
Afzal Sultanpuri
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जो
साँसों
को
गिनते
गिनते
जीता
है
उसकी
मौत
ज़रा
जल्दी
आ
जाती
है
Tanoj Dadhich
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हमारी
मौत
पर
बेशक़
ज़माना
आएगा
रोने
मगर
ज़िंदा
हैं
जब
तक
चैन
से
जीने
नहीं
देगा
Astitwa Ankur
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मौत
का
भी
इलाज
हो
शायद
ज़िंदगी
का
कोई
इलाज
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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रहता
है
इबादत
में
हमें
मौत
का
खटका
हम
याद-ए-ख़ुदा
करते
हैं
कर
ले
न
ख़ुदा
याद
Akbar Allahabadi
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उसके
जाने
और
आने
में
फ़क़त
यह
फ़र्क़
है
दूर
जाती
मौत
है
तो
पास
आती
ज़िन्दगी
Divy Kamaldhwaj
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माँ
की
आग़ोश
में
कल
मौत
की
आग़ोश
में
आज
हम
को
दुनिया
में
ये
दो
वक़्त
सुहाने
से
मिले
Kaif Bhopali
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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मैं
अपनी
मौत
से
ख़ल्वत
में
मिलना
चाहता
हूँ
सो
मेरी
नाव
में
बस
मैं
हूँ
नाख़ुदा
नहीं
है
Pallav Mishra
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ज़िन्दगी
तू
आज़माना
छोड़
दे
मौत
से
कह
दे
बहाना
छोड़
दे
फूँकने
के
काम
वो
आता
मकाँ
जब
परिन्दा
आशियाना
छोड़
दे
यार
क़िस्मत
से
भी
भागा
है
कोई
बेसबब
आँसू
बहाना
छोड़
दे
छोड़
दूँ
उसकी
गली
उसका
नगर
वो
मिरे
ख़्वाबों
में
आना
छोड़
दे
यार
तू
माता-पिता
को
रब
समझ
हर
कहीं
भी
सर
झुकाना
छोड़
दे
फूल
के
बदले
जहाँ
काँटे
मिलें
ऐसे
तू
रिश्ते
निभाना
छोड़
दे
चाँद
पाने
के
लिए
नादाँ
'धरम'
हो
सके
तो
कसमसाना
छोड़
दे
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Dharamraj deshraj
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नज़र
से
पिलाई
कहा
कुछ
नहीं
नशा
फिर
भी
यारो
हुआ
कुछ
नहीं
लिया
कुछ
नहीं
और
दिया
कुछ
नहीं
कहाँ
खो
गया
दिल
पता
कुछ
नहीं
खफ़ा
हो
तो
बेशक़
मिरी
जान
लो
तग़ाफुल
से
बढ़कर
बुरा
कुछ
नहीं
भला
हूँ
बुरा
हूँ
पता
है
उसे
मिरे
रब
से
आख़िर
छुपा
कुछ
नहीं
असर
हो
दवा
में
तो
हो
किस
तरह
अगर
साथ
में
हो
दु'आ
कुछ
नहीं
फ़क़त
उनका
ख़्वाबों
में
बोसा
लिया
बहुत
कुछ
हुआ
और
हुआ
कुछ
नहीं
रहे
या
मिटे
बादशाहत
'धरम'
करे
जो
किसी
का
भला
कुछ
नहीं
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Dharamraj deshraj
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तुझको
पाकर
मैं
खो
नहीं
सकता
जन्म
भर
ऐसा
हो
नहीं
सकता
मेरी
गै़रत
ने
रोक
रक्खा
है
ख़ुद
को
ग़म
में
डुबो
नहीं
सकता
बेवफ़ाई
का
दाग़
मत
देना
आँसुओ
से
भी
धो
नहीं
सकता
वा'दा
हँसने
का
कर
चुका
आख़िर
चाह
कर
भी
मैं
रो
नहीं
सकता
है
क़लम
हल,
ज़मीन
काग़ज़
की
अपने
आँसू
भी
बो
नहीं
सकता
अश्क़
मोती
हैं
मत
करो
ज़ाया'
ऐसे
मोती
पिरो
नहीं
सकता
मौत
कब
वस्ल
को
'धरम'
आए
बेख़बर
होके
सो
नहीं
सकता
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Dharamraj deshraj
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वक़्त
के
बन
ग़ुलाम
हम
सारे
नक़्शे-पा
अपने
छोड़
जाते
हैं
Dharamraj deshraj
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दोस्ती
की
अभी
अभी
उन
सेे
ज़ख़्म
हमको
अभी
से
मिलते
हैं
Dharamraj deshraj
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