waqt ki baat pe dil ke bhi saaz pe | वक़्त की बात पे दिल के भी साज़ पे

  - Deep kamal panecha
वक़्तकीबातपेदिलकेभीसाज़पे
नज़्मलिखतारहातेरेअंदाज़पे
क़ब्रमेंहूँपड़ाजानेकबहीसेमैं
परमैंआऊँगाउठतेरीआवाज़पे
सोचताहूँकभीमैंयूँँहीबैठकर
क्यूँँमैंखिलजाताहूँतेरेआगाज़पे
आरज़ूइकतिरीयेजहाँदेखना
मैंदिखाऊँगातुमकोबिठाबाज़पे
आपकोनालगेंअच्छेहैंहममगर
दाददेतेरहोमेरेएजाज़पे
फ़क़्रतुमकोहैंमानूँगामैंबातहर
इसलिएमैंचलाहूँतिरीनाज़पे
  - Deep kamal panecha
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