sitam ik aur khaaye jee rahe hain | सितम इक और खाए जी रहे हैं

  - Deep kamal panecha
सितमइकऔरखाएजीरहेहैं
हुनरख़ुदआज़माएजीरहेहैं
करोमतरश्कमेरेजीनेपेतुम
तिरेशाइरबनाएजीरहेहैं
बरहनाज़ख़्महैंतुमकोख़बरहैं
अदूलज़्ज़तउठाएजीरहेहैं
तुझेहीना-पसंदहैंदीदमेरी
मुझेदेखेपराएजीरहेहैं
फ़िराक़े-यारफ़ुर्क़तहिज्रनफ़रत
येसबहमसरउठाएजीरहेहैं
मुहब्बतइश्क़उल्फ़तप्यारचाहत
अकेलेहमनिभाएजीरहेहैं
तुम्हेंहमयादकरतेहैंमुसलसल
मुसलसलजीदुखाएजीरहेहैं
क़समहैंआपकोमिस्मारकरदो
यूँँभीतोज़ख़्मखाएजीरहेहैं
रहेहाज़िरउजालासुब्हमेंसो
लहूअपनाजलाएजीरहेहैं
  - Deep kamal panecha
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