ham bhi le sakte the badla zulm ka talwaar se | हम भी ले सकते थे बदला ज़ुल्म का तलवार से

  - Dard Faiz Khan
हमभीलेसकतेथेबदलाज़ुल्मकातलवारसे
जंगपरजीतीथीहमनेअम्नकीगुफ़्तारसे
देखनेआयाथारौनक़आजमैंबाज़ारकी
ग़मकाहीकमदामथासोलेलियाबाज़ारसे
रुख़सेपर्दावोहटादेतोबनेगीकोईबात
अबइनआँखोंकोगरज़हैउसकेहीदीदारसे
थकगयापढ़पढ़केमैंख़बरेंसितमकीजब्रकी
होगईनफ़रतसीमुझकोआजकलअख़बारसे
सबकेअबहैंशादमाँमारेहसदकेदेखतो
औरयेमौक़ामिलाउनकोतिरेइंकारसे
ख़ालीदामनलेकेहमसरकोझुकाएहैंखड़े
आजख़ालीपरजाएँगेतिरेदरबारसे
तीरगीऐसेजहालतकीहोपाएगीकम
फ़िक्रकेसूरजउगाओज़ेहनकीदीवारसे
शर्मसेउसकीभीआँखेंउठनहींपाईंथीफिर
फैज़रुसवाहोकेजबनिकलाथाकू-ए-यारसे
  - Dard Faiz Khan
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