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Chetan
log jal
log jal | लोग जल्दी परोस देते हैं
- Chetan
लोग
जल्दी
परोस
देते
हैं
इल्म
घोंटो
तो
चखने
जितना
है
- Chetan
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इक
गुमाँ
से
उलझ
रहा
था
मैं
तुझको
नादाँ
समझ
रहा
था
मैं
Chetan
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हम
अँधेरे
में
बैठे
लोगों
पर
नूर
भी
साए
सा
गुज़रता
है
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इस
कहानी
से
ग़म
सिमट
जाता
मेरा
किरदार
भी
निपट
जाता
साथ
उम्मीद
उनके
आने
की
ख़त्म
है
डर
कि
मैं
पलट
जाता
आई
बैठी
चली
ख़ुशी
मेरी
ग़म
जो
आता
तो
बस
लिपट
जाता
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Chetan
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शहर
में
जाने
कैसे
रहते
हो
बारहा
गाँव
आते
रहते
हो
आपके
बाद
रहना
मुश्किल
है
ऐसे
क्यूँ
साथ
मेरे
रहते
हो
इक
वो
जो
बात
साफ़
दिखती
है
इक
जो
आँखों
से
कहते
रहते
हो
अब
नए
तौर
का
उजाला
है
तुम
हो
लपटों
में
जलते
रहते
हो
मान
कर
अपना
उसके
लोगों
को
सच
कहो
तन्हा
कितने
रहते
हो
उस
सेे
तुम
बात
क्यूँ
नहीं
करते
जिसकी
तुम
बातें
करते
रहते
हो
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Chetan
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बचपना
साथ
बाँटा
था
जिसके
वो
जवानी
भी
खा
गया
मेरी
Chetan
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