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Chetan
ik gumaan se uljh raha tha main
ik gumaan se uljh raha tha main | इक गुमाँ से उलझ रहा था मैं
- Chetan
इक
गुमाँ
से
उलझ
रहा
था
मैं
तुझको
नादाँ
समझ
रहा
था
मैं
- Chetan
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उसे
महसूस
भी
होने
न
दूँगा
कि
उसके
प्यार
में
मैं
मर
चुका
हूँ
Umesh Maurya
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दोनों
हाथों
को
तेरे
हाथ
समझ
कर
जानाँ
अपने
गालों
पे
ख़ुद
ही
रंग
लगाया
मैंने
Upendra Bajpai
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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वो
ना-समझ
मुझे
पत्थर
समझ
के
छोड़
गया
वो
चाहता
तो
सितारे
तराशता
मुझ
से
Shahid Zaki
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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ख़ुद
को
इतना
जो
हवा-दार
समझ
रक्खा
है
क्या
हमें
रेत
की
दीवार
समझ
रक्खा
है
Haseeb Soz
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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दर्द
में
शिद्दत-ए-एहसास
नहीं
थी
पहले
ज़िंदगी
राम
का
बन-बास
नहीं
थी
पहले
Shakeel Azmi
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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आप
तो
जानते
हो
क्या
होगा
इस
तजुर्बे
से
कुछ
नया
होगा
ये
मेरे
ग़म
हैं
और
लाचारी
जाने
अब
इनके
साथ
क्या
होगा
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Chetan
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त'अज्जुब
तुझ
सेे
मिलना
था
बिछड़ने
पर
भी
हैरत
है
मसीहा
वो
नहीं
था
मैं
न
वो
हैवान
बन
पाया
Chetan
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किसे
है
पता
नाप
इस
ज़ीने
का
मिला
है
सहारा
कई
कीने
का
इजाज़त
नहीं
थी
मुझे
मरने
की
मुझे
शौक़
अब
था
नहीं
जीने
का
उसे
प्यार
की
आग
में
जलना
था
यहाँ
बर्फ़
सा
भार
है
सीने
का
नज़र
में
कभी
थी
मोहब्बत
मगर
अभी
वक़्त
है
अश्क
ही
पीने
का
किसे
देख
कर
मैं
सुधारा
करूँँ
पिघलने
लगा
अक्स
आईने
का
बदलने
लगे
वक़्त
के
साथ
सब
बिगड़ता
रहा
हाल
तख़मीने
का
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Chetan
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बचता
सामान
जिस
किसी
का
है
ये
निगहबान
बस
उसी
का
है
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मुश्किलें
बढ़
गईं
मोहब्बत
में
जब
से
जाना
है
क्या
मोहब्बत
है
Chetan
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