मकाँख़ालीरहाकमरानहींछोड़ा
कभीहक़केलिएज़िम्मानहींछोड़ा
बहकजाएँनहमभीहोशमेंआकर
वफ़ाथा
मेंरहेनश्शानहींछोड़ा
कईरिश्तोंकोतोड़ाहैमगरहमने
कभीरोताहुआबंदानहींछोड़ा
बताएवोकभीअबक्यासँभालेहै
मुझेछोड़ाथाजिसनेक्यानहींछोड़ा
अगरचेहमनेपैरोंकोभीपकड़ाथा
मगरउनहाथोंनेबस्तानहींछोड़ा