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Bhoomi Srivastava
maayub jis jis ne bataaya hai mujhe
maayub jis jis ne bataaya hai mujhe | मायूब जिस जिस ने बताया है मुझे
- Bhoomi Srivastava
मायूब
जिस
जिस
ने
बताया
है
मुझे
मैं
मर
गई
उस
वक़्त
ही
उन
के
लिए
- Bhoomi Srivastava
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साल
के
आख़िरी
दिन
उसने
दिया
वक़्त
हमें
अब
तो
ये
साल
कई
साल
नहीं
गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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माँ
की
आग़ोश
में
कल
मौत
की
आग़ोश
में
आज
हम
को
दुनिया
में
ये
दो
वक़्त
सुहाने
से
मिले
Kaif Bhopali
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वक़्त
रहता
नहीं
कहीं
टिक
कर
आदत
इस
की
भी
आदमी
सी
है
Gulzar
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सब
कुछ
तो
है
क्या
ढूँडती
रहती
हैं
निगाहें
क्या
बात
है
मैं
वक़्त
पे
घर
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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मैं
माँ
की
ही
बदौलत
आज
क़ाबिल
हो
सकी
इतनी
नहीं
तो
फ़कीरी
का
कहा
सुन
कर
वो
मेरी
रोक
सकती
थी
पढ़ाई
Bhoomi Srivastava
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मैं
अगर
इक
फूल
पर
तेरी
हसीं
तस्वीर
रख
दूँ
ऐन
मुमकिन
है
कि
सारी
तितलियाँ
उस
पे
मिलेंगी
Bhoomi Srivastava
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मुहब्बत
वो
भी
करता
है
मुहब्बत
हम
भी
करते
हैं
मगर
इक
दूसरे
को
कहने
से
दोनों
ही
डरते
हैं
Bhoomi Srivastava
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बिन
नौकरी
सपने
सजाए
अच्छा
थोड़ी
लगता
है
बेटी
के
होते
माँ
कमाए
अच्छा
थोड़ी
लगता
है
मिलती
है
इक
ही
ज़िंदगी
मुश्किल
से
तो
यारों
यहाँ
उसको
भी
रो
धो
के
बिताए
अच्छा
थोड़ी
लगता
है
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Bhoomi Srivastava
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तेरी
यादों
में
ऐसे
रोती
हूँ
जैसे
मेले
में
खोई
बच्ची
हूँ
Bhoomi Srivastava
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