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Bhavesh Lohani
hawa tere mukhalif hi chali to
hawa tere mukhalif hi chali to | हवा तेरे मुखालिफ़ ही चली तो
- Bhavesh Lohani
हवा
तेरे
मुखालिफ़
ही
चली
तो
उसे
घर
जाने
की
जल्दी
हुई
तो
किसी
से
मिलने
की
हसरत
हुई
है
अगर
तक़दीर
से
भी
ना
बनी
तो
अभी
तो
आसमा
ये
साफ़
है
पर
जहाँ
की
धूल
ऐनक
पर
जमी
तो
ख़ुशी
के
साथ
कैसे
बैठ
जाऊ
दुखों
के
मुँह
की
रौनक
उड़
गई
तो
लिहाज़ा
मैं
नहीं
आता
तेरे
दर
तेरे
दर
पर
अगर
लाइन
मिली
तो
तुझे-ए-सावली
लड़की
ख़बर
है
अगर
मुझको
मोहब्बत
हो
गई
तो
- Bhavesh Lohani
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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मेरे
साथ
हँसने
वालों
शरीक
हों
दुख
में
गर
गुलाब
की
ख़्वाहिश
है
तो
चूम
काँटों
को
Neeraj Neer
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चराग़
दिल
का
मुक़ाबिल
हवा
के
रखते
हैं
हर
एक
हाल
में
तेवर
बला
के
रखते
हैं
Hastimal Hasti
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चराग़ों
को
उछाला
जा
रहा
है
हवा
पर
रौब
डाला
जा
रहा
है
Rahat Indori
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
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तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
Fahmi Badayuni
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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लो
हमारा
जवाब
ले
जाओ
ये
महकता
गुलाब
ले
जाओ
Aleena Itrat
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अम्मा
बोली
शहर
नहीं
जाने
दूंगी
अब
लल्ला
कहता
रहता
मैं
तो
इश्क़
करूँँगा
Bhavesh Lohani
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मोहब्बत
में
अकेले
फ़ैसला
क्यूँ
हो
मेरा
भी
मशवरा
मुझ
सेे
लिया
जाए
Bhavesh Lohani
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किसी
आवाज़
से
प्यारे
परिंदे
उड़
गए
सारे
शब-ए-हिज्रा
रुलाती
थी
गिरा
करते
थे
अंगारे
मुकम्मल
चाँद
छत
पर
था
चले
आए
सभी
तारे
हमारे
हाथ
ख़ाली
है
बहुत
कुछ
जीतकर
हारे
तुम्हारे
वास्ते
हम
हैं
हमारे
वास्ते
प्यारे?
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Bhavesh Lohani
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इस
बला
के
हिज्र
में
'भावेश
जी'
किस
बला
को
याद
करना
है
तुम्हें
Bhavesh Lohani
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हम
नया
एक
ख़्वाब
देखेंगे
फिर
पुरानी
किताब
देखेंगे
याद
ताज़ा
करेंगे
हम
तेरी
कोई
सूखा
गुलाब
देखेंगे
हम
उन्हें
देखते
ही
रहते
हैं
क्या
हमें
भी
जनाब
देखेंगे
ख़ुद
को
बीमार
ही
करेंगे
और
लोग
इस
में
अज़ाब
देखेंगे
हाल
चल
ठीक-ठाक
होगा
पर
आदतें
तो
ख़राब
देखेंगे
जाम
से
मयकशी
ग़ज़ब
की
है
रिंद
भी
क्या
हिसाब
देखेंगे
वो
ग़ज़ल
को
सवाल
सोचेंगे
या
ग़ज़ल
में
जवाब
देखेंगे
तेरी
मेहनत
को
कौन
पूछेगा
सब
यहाँ
पर
ख़िताब
देखेंगे
आप
'भावेश'
सर
उठाएँ
बस
आपको
कामयाब
देखेंगे
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Bhavesh Lohani
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