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Ashutosh Kumar "Baagi"
yaar dikhaave ka gham meraa
yaar dikhaave ka gham meraa | यार दिखावे का ग़म मेरा
- Ashutosh Kumar "Baagi"
यार
दिखावे
का
ग़म
मेरा
मुझ
को
सच
में
खा
जाएगा
- Ashutosh Kumar "Baagi"
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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हुआ
जौन
को
पढ़
के
मालूम
ये
उदासी
का
भी
इक
कलर
होता
है
Viru Panwar
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जानता
हूँ
एक
ऐसे
शख़्स
को
मैं
भी
'मुनीर'
ग़म
से
पत्थर
हो
गया
लेकिन
कभी
रोया
नहीं
Muneer Niyazi
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अपने
क़ातिल
की
ज़ेहानत
से
परेशान
हूँ
मैं
रोज़
इक
मौत
नए
तर्ज़
की
ईजाद
करे
Parveen Shakir
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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लाखों
सद
में
ढेरों
ग़म
फिर
भी
नहीं
हैं
आँखें
नम
इक
मुद्दत
से
रोए
नहीं
क्या
पत्थर
के
हो
गए
हम
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Azm Shakri
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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किसकी
बारी
है
अब
मियाँ
मुझ
में
कौन
लेता
है
हिचकियाँ
मुझ
में
काश
मंज़िल
कोई
मुझे
कहता
सबको
दिखती
हैं
सीढ़ियाँ
मुझ
में
रोज़
किरदार
एक
मरता
है
टूटी
रहती
हैं
चूड़ियाँ
मुझ
में
क़ब्र
हूँ
और
चलती
फिरती
हूँ
दफ़्न
कितनी
हैं
सिसकियाँ
मुझ
में
क़ुर्बतों
का
सिला
मिला
ऐसा
रह
गईं
हैं
तो
दूरियाँ
मुझ
में
मैं
तो
कमज़र्फ़
एक
सहरा
हूँ
ढूँढ़ती
है
वो
सीपियाँ
मुझ
में
गर्मियों
में
मुझे
वो
छोड़
गया
जिसने
काटी
थीं
सर्दियाँ
मुझ
में
इश्क़
के
फूल
जो
खिले
मुझ
में
छोड़
दी
हिज्र
बकरियाँ
मुझ
में
तुग़लक़ी
हुक्म
उसके
आते
हैं
फिर
उजड़ती
हैं
दिल्लियाँ
मुझ
में
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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दर्द
में
आ
रहा
मज़ा
साहब
तुमने
ऐसा
है
क्या
किया
साहब
ख़िज़्र
की
उम्र
भी
अता
कर
दी
फिर
तेरा
हिज्र
भी
दिया
साहब
अब
नहीं
बोलते
मेरे
हक़
में
बन
गए
तुम
भी
अब
ख़ुदा
साहब
हाथ
छूटे
नहीं
कभी
अपने
उम्र
भर
हम
रहे
जुदा
साहब
मुझको
छोड़ा
मेरी
ख़ुशी
के
लिए
ग़म
इसी
बात
का
रहा
साहब
मुझको
अब
आप
बस
दु'आ
दीजे
काम
आई
न
कुछ
दवा
साहब
उसकी
ग़लती
थी
इश्क़
कर
बैठा
वरना
था
आदमी
भला
साहब
ख़ुशनसीबी
है
तुम
सेे
इश्क़
हुआ
और
ये
ही
मेरी
सज़ा
साहब
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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वो
शीरीनी
मुझे
महसूस
होगी
वो
जब
भी
ग़ैर
को
चूमा
करेगी
Ashutosh Kumar "Baagi"
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हाए
क्या
दिन
थे
वो
मोहब्बत
के
एक
काफ़िर
रहा
ख़ुदा
मेरा
Ashutosh Kumar "Baagi"
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मेरा
हाल
पता
भी
है
या
नेकी
कर
के
भूल
गए
हो
Ashutosh Kumar "Baagi"
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