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Ashutosh Kumar "Baagi"
ab main samjha aaKHir kyun kar raat banaai hai usne
ab main samjha aaKHir kyun kar raat banaai hai usne | अब मैं समझा आख़िर क्यूँँ कर रात बनाई है उसने
- Ashutosh Kumar "Baagi"
अब
मैं
समझा
आख़िर
क्यूँँ
कर
रात
बनाई
है
उसने
तारे
गिन
लें,
बातें
कर
लें
चाँद
से,
हिज्र
के
मारे
लोग
- Ashutosh Kumar "Baagi"
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हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
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Alankrat Srivastava
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सुब्ह
तक
हिज्र
में
क्या
जानिए
क्या
होता
है
शाम
ही
से
मिरे
क़ाबू
में
नहीं
दिल
मेरा
Jigar Moradabadi
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियांँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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कितना
आसाँ
था
तिरे
हिज्र
में
मरना
जानाँ
फिर
भी
इक
उम्र
लगी
जान
से
जाते
जाते
Ahmad Faraz
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बहन
का
प्यार
जुदाई
से
कम
नहीं
होता
अगर
वो
दूर
भी
जाए
तो
ग़म
नहीं
होता
Unknown
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अब
यही
सोचते
रहते
हैं
बिछड़
कर
तुझ
से
शायद
ऐसे
नहीं
होता
अगर
ऐसा
करते
Asim Wasti
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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वो
एक
शख़्स
जो
दिखने
में
ठीक-ठाक
सा
था
बिछड़
रहा
था
तो
लगने
लगा
हसीन
बहुत
Siraj Faisal Khan
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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तेरी
ही
ज़िद
करता
हूँ
इश्क़
में
थोड़ा
कच्चा
हूँ
छोड़
दिया
अच्छा
कह
कर
मोती
हूँ
पर
ज़ाया'
हूँ
वो
तो
सदा
देता
होगा
मैं
ही
शायद
बहरा
हूँ
जान
नहीं
दूँगा
अपनी
मैं
बस
यूँँ
ही
कहता
हूँ
क्यूँँ
मैं
टूटा
हूँ
इतना
क्या
मैं
कोई
वा'दा
हूँ
मुझको
क्यूँँ
चुप
करते
हो
तेरा
ही
तो
तोता
हूँ
दो
दिन
की
ख़ातिरदारी
क़ुर्बानी
का
बकरा
हूँ
दिल
में
मुझको
तू
रख
ले
जैसे
कोई
शिकवा
हूँ
यार
मुझे
तू
फुसला
ले
सीधा
सादा
बच्चा
हूँ
दर्द
मेरा
क्या
समझोगे
ख़िज़्र
हूँ
मैं
औ
भटका
हूँ
कान्हा
हो
तुम
लेकिन
मैं
राधा
हूँ
या
मीरा
हूँ
कल
मैं
ग़ज़लें
काटूँगा
आज
मैं
आँसू
बोता
हूँ
मेरा
जाने
क्या
होगा
पानी
हूँ
औ
ठहरा
हूँ
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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मैं
तो
कमज़र्फ़
एक
सहरा
हूँ
ढूँढ़ती
है
वो
सीपियाँ
मुझ
में
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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कान्हा
हो
तुम
लेकिन
मैं
राधा
हूँ
या
मीरा
हूँ
Ashutosh Kumar "Baagi"
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उस
ने
अपने
बाल
काटे
हाए
रे
कुछ
यूँँ
लगा
ज़िन्दगी
से
कोई
मेरी,
साल
जैसे
काट
दे
Ashutosh Kumar "Baagi"
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दर्द
में
आ
रहा
मज़ा
साहब
तुमने
ऐसा
है
क्या
किया
साहब
ख़िज़्र
की
उम्र
भी
अता
कर
दी
फिर
तेरा
हिज्र
भी
दिया
साहब
अब
नहीं
बोलते
मेरे
हक़
में
बन
गए
तुम
भी
अब
ख़ुदा
साहब
हाथ
छूटे
नहीं
कभी
अपने
उम्र
भर
हम
रहे
जुदा
साहब
मुझको
छोड़ा
मेरी
ख़ुशी
के
लिए
ग़म
इसी
बात
का
रहा
साहब
मुझको
अब
आप
बस
दु'आ
दीजे
काम
आई
न
कुछ
दवा
साहब
उसकी
ग़लती
थी
इश्क़
कर
बैठा
वरना
था
आदमी
भला
साहब
ख़ुशनसीबी
है
तुम
सेे
इश्क़
हुआ
और
ये
ही
मेरी
सज़ा
साहब
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Ashutosh Kumar "Baagi"
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