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Azhan 'Aajiz'
mujhe de-de udaasi ya ilaahi
mujhe de-de udaasi ya ilaahi | मुझे दे-दे उदासी या इलाही
- Azhan 'Aajiz'
मुझे
दे-दे
उदासी
या
इलाही
मिरी
है
रूह
प्यासी
या
इलाही
- Azhan 'Aajiz'
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मेरे
महबूब
मत
बेचैन
होना
तेरे
क़ासिद
ने
ख़त
पहुँचा
दिया
है
Shajar Abbas
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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कहा
जो
कृष्ण
ने
गीता
में
रक्खेगा
अगर
तू
याद
भले
जितना
घना
जंगल
हो
पर
तू
खो
नहीं
सकता
Amaan Pathan
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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ज़िंदगी
भर
वो
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
एक
तस्वीर
जो
हँसते
हुए
खिंचवाई
थी
Yasir Khan
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उदासी
इक
समुंदर
है
कि
जिसकी
तह
नहीं
है
मैं
नीचे
और
नीचे
और
नीचे
जा
रहा
हूँ
Charagh Sharma
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लगाई
है
सियासत
ने
वतन
में
आग
नफ़रत
की
चला
दे
तू
ख़ुदाया
जो
हवाएँ
हैं
मुहब्बत
की
दिखाते
हैं
हुक़ूमत
की
हमें
ताक़त
यहाँ
अपनी
दिखा
वो
तू
ज़रा
ताक़त
ख़ुदा
अपनी
हुक़ूमत
की
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Azhan 'Aajiz'
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किसी
इक
गहरे
क़ुल्ज़ुम
की
तरह
हैं
ये
तिरी
आँखें
किसी
भी
रोज़
इन
में
डूब
कर
मैं
मर
ही
जाऊँगा
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Azhan 'Aajiz'
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मुझे
उर्दू
की
हासिल
गुफ़्तगू
है
मिरे
लहजे
में
भी
इक
मुश्क-बू
है
मिरी
जो
यार
हस्ब-ए-आरज़ू
है
फ़क़त
तू
और
तू
है
सिर्फ़
तू
है
पता
मेरा
नहीं
कुछ
मुझ
में
लेकिन
बसा
कोई
तू
है
फिर
हू-ब-हू
है
मुयस्सर
तू
न
होगा
इल्म
है
पर
मुझे
फिर
भी
तिरी
ही
जुस्तजू
है
तिरा
चेहरा
बसा
आँखों
में
मेरी
कि
दिखता
तू
मुझे
अब
चार-सू
है
हमारे
दिल
मुहल्ला
में
तिरी
याद
अज़ीज़म
कू-ब-कू
है
कू-ब-कू
है
हुआ
क्या
हादसा
दरपेश
'आजिज़'
ख़ुदा
की
सम्त
तेरा
जो
रुजू
है
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Azhan 'Aajiz'
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अजब
सी
इक
उदासी
है
मिरे
दिल
में
करूँँ
तो
क्या
करूँँ
मैं
यार
मुश्किल
में
Azhan 'Aajiz'
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तुम्हें
ही
जब
नहीं
मुझ
पर
यक़ीं
तो
फिर
भला
क्यूँँ
ख़ुद
पर
अब
ईमान
लाऊँ
मैं
Azhan 'Aajiz'
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