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Azhan 'Aajiz'
dekh udte main parinde aasmaañ men
dekh udte main parinde aasmaañ men | देख उड़ते मैं परिन्दे आसमाँ में
- Azhan 'Aajiz'
देख
उड़ते
मैं
परिन्दे
आसमाँ
में
सोचता
हूँ
यार
क्या
अपने
गुमाँ
में
- Azhan 'Aajiz'
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वक़्त
आने
दे
दिखा
देंगे
तुझे
ऐ
आसमाँ
हम
अभी
से
क्यूँँ
बताएँ
क्या
हमारे
दिल
में
है
Bismil Azimabadi
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आसमाँ
में
है
ख़ुदा,
क्या
सब
दुआएंँ
आसमाँ
तक
जा
रही
हैं
मेरी
इक
फ़रयाद
पूरी
हो
तो
मैं
मानूँ
वहाँ
तक
जा
रही
हैं
Saahir
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आसमाँ
से
गरज
छेड़ती
है
हमें
एक
बारिश
में
भी
भीगे
थे
साथ
हम
Parul Singh "Noor"
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जितनी
बटनी
थी
बट
चुकी
ये
ज़मीं
अब
तो
बस
आसमान
बाक़ी
है
Rajesh Reddy
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मेरे
हुजरे
में
नहीं
और
कहीं
पर
रख
दो
आसमाँ
लाए
हो
ले
आओ
ज़मीं
पर
रख
दो
Rahat Indori
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कभी
किसी
को
मुकम्मल
जहाँ
नहीं
मिलता
कहीं
ज़मीन
कहीं
आसमाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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हम
वो
हैं
जो
नइँ
डरते
वक़्त
के
इम्तिहान
से
वो
परिंदे
और
थे
जो
डर
गए
आसमान
से
Madhav
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वो
मिलेंगे
उस
जहाँ
के
आसमाँ
में
मिल
न
पाए
जो
परिंदे
इस
ज़मीं
पर
Raj Tiwari
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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वो
कमतर
सभी
अपने
घर
बैठे
हैं
यहाँ
पर
सब
अहले-हुनर
बैठे
हैं
इधर
तो
उधर
देखता
हूँ
मैं
ये
वो
महफ़िल
में
आ
के
किधर
बैठे
हैं
हमें
छोड़
के
तू
गया
था
जिधर
तू
आए
हम
अब
भी
उधर
बैठे
हैं
जो
बर्बाद
हैं
इश्क़
में
और
हैं
मुहब्बत
में
हम
बन-सँवर
बैठे
हैं
हमारी
यही
दास्ताँ
है
कि
हम
न
करना
था
जो
काम
कर
बैठे
हैं
यही
लोग
जो
ख़ास
हैं
बन
के
ये
रुकावट
कि
राहे-सफ़र
बैठे
हैं
बढ़ा
जज़्ब
देखा
कि
महफ़िल
में
ये
हैं
कुछ
लोग
जो
हम-नज़र
बैठे
हैं
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Azhan 'Aajiz'
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मैं
ज़ीस्त
के
नहीं
कि
क़ज़ा
के
क़रीब
हूँ
मैं
तो
उसी
की
दोस्त
वफ़ा
के
क़रीब
हूँ
लोगों
उदास
शख़्स
को
कहते
हो
क्यूँँ
बुरा
मैं
इस
उदासी
से
ही
ख़ुदा
के
क़रीब
हूँ
क्या
जुर्म
है
मिरा
मुझे
मालूम
भी
नहीं
पर
एक
जुर्म
की
मैं
सज़ा
के
क़रीब
हूँ
ये
आज़मा
रहे
हैं
मुझे
यार
किस
तरह
'आरिज़'
दिया
हूँ
और
हवा
के
क़रीब
हूँ
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Azhan 'Aajiz'
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दिल
में
तुझे
रखूँ
तो
अब
मैं
कहाँ
रहूँ
फिर
तलवार
दो
मुझे
रखनी,
इक
मियान
में
अब
कोई
ज़रा
बने
साथी
यार
अब
मिरा
भी
लगता
नहीं
मिरा
ये
दिल,
इस
जहान
में
अब
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Azhan 'Aajiz'
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आपकी
नज़रें
क़यामत
हैं
आप
कितनी
ख़ूब-सूरत
हैं
मुस्कुराहट
आपकी
बातें
इस
दिवाने
दिल
की
राहत
हैं
ख़्वाब
में
हम
देखते
हैं
जो
आप
तो
वो
ही
हक़ीक़त
हैं
आपका
होना
हमारे
पास
वाक़ई
हम
ख़ूब
क़िस्मत
हैं
जो
सुकूँ
दे
वो
रफ़ाक़त
हैं
हर
तरह
मेरी
ज़रूरत
हैं
फ़ैसला
वो
भी
बिछड़ने
का
होश
तो
तेरे
सलामत
हैं
और
जिसके
बाद
क़िस्सा
ख़त्म
आप
मेरी
वो
मुहब्बत
हैं
ऐसे
ही
तो
मैं
नहीं
आजिज़
आपकी
यादें
अज़िय्यत
हैं
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बिखरते-उलझते
शबो-रोज़
कैसे
गुज़ारें
भला
थकन
जिस्म
की
ज़िन्दगी
बोल
कैसे
उतारें
भला
Azhan 'Aajiz'
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