chale aao mujhe milne kabhi chhupkar zamaane se | चले आओ मुझे मिलने कभी छुपकर ज़माने से

  - Avinash bharti
चलेआओमुझेमिलनेकभीछुपकरज़मानेसे
बहुतहीथकगयाहूँमैंतुम्हेंहरपलबुलानेसे
करूँँकबतकतेरीबातेंचराग़ोंसेअँधेरोंसे
तूकरआकररिहाईअबमेरीइसक़ैदख़ानेसे
तुम्हेंदेखेबिनाभीइश्क़करतेहैंतुम्हींसेहम
मुहब्बतमिटनहींजातीकिसीकेदूरजानेसे
कभीख़ुदसे,हीघंटोंतक,तुम्हारीबातकरतेहैं
अकेलेहोगएकितनेतुम्हारेछोड़जानेसे
मुहब्बतहोअगरसच्चीकभीबूढ़ीनहींहोती
वोदिनभीलौटआएँगेतुम्हारेलौटआनेसे
  - Avinash bharti
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