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Ashraf Ali
jitne marzi khel khelo khoob saazish bhi racho
jitne marzi khel khelo khoob saazish bhi racho | जितने मर्ज़ी खेल खेलो ख़ूब साज़िश भी रचो
- Ashraf Ali
जितने
मर्ज़ी
खेल
खेलो
ख़ूब
साज़िश
भी
रचो
वक़्त
आने
दो
कहूँगा,
उंगलियाँ
अंदर
रखो
- Ashraf Ali
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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सब
कुछ
तो
है
क्या
ढूँडती
रहती
हैं
निगाहें
क्या
बात
है
मैं
वक़्त
पे
घर
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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तुम
बड़े
अच्छे
वक़्त
पर
आए
आज
इक
ज़ख़्म
की
ज़रूरत
थी
Zubair Ali Tabish
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वक़्त
देता
था
वो
मिलने
का
तभी
रक्खी
थी
दोस्त
इक
दौर
था
मैंने
भी
घड़ी
रक्खी
थी
Nadir Ariz
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वक़्त
करता
है
परवरिश
बरसों
हादिसा
एक
दम
नहीं
होता
Qabil Ajmeri
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वक़्त
हर
ज़ख़्म
का
मरहम
तो
नहीं
बन
सकता
दर्द
कुछ
होते
हैं
ता-उम्र
रुलाने
वाले
Sada Ambalvi
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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माँ
से
तेरे
बारे
में
और
तुझ
सेे
माँ
के
बारे
में
बातें
करके
कितना
अच्छा
वक़्त
गुज़ारा
है
मैंने
Tanoj Dadhich
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वो
इक
नदी
जो
कभी
तेज़-तेज़
बहती
थी
वो
आज
रेत
के
मैदान
सी
बिछी
हुई
है
मैं
इक
दरख़्त
था
'अशरफ़'
किसी
ज़माने
में
खिज़ां
के
कहरस
अब
ठूँठ
ही
बची
हुई
है
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Ashraf Ali
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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सुना
है
बज़्म
में
कल
उसके
ख़ूब
चर्चे
थे
जरूर
उसने
मेरा
नज़्म
पढ़
दिया
होगा
Ashraf Ali
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मुआमला
था
महज़
मुक़द्दर
का
मेरा
महबूब
निकला
पत्थर
का
Ashraf Ali
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सब
महँगे
ज़ेवरात
की
क़ीमत
घटाऊँगा
सोने
का
नाम
आज
से
पीतल
करूँँगा
मैं
Ashraf Ali
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