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Ashok Sagar
farz o sunnat to pahle ada keejie
farz o sunnat to pahle ada keejie | फर्ज़ ओ सुन्नत तो पहले अदा कीजिए
- Ashok Sagar
फर्ज़
ओ
सुन्नत
तो
पहले
अदा
कीजिए
फिर
ये
कहना
के
मौला
अता
कीजिए
- Ashok Sagar
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अदा
हुआ
न
क़र्ज़
और
वजूद
ख़त्म
हो
गया
मैं
ज़िंदगी
का
देते
देते
सूद
ख़त्म
हो
गया
Faryad Aazar
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आफ़त
तो
है
वो
नाज़
भी
अंदाज़
भी
लेकिन
मरता
हूँ
मैं
जिस
पर
वो
अदा
और
ही
कुछ
है
Ameer Minai
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मैं
देर
तक
तुझे
ख़ुद
ही
न
रोकता
लेकिन
तू
जिस
अदास
उठा
है
उसी
का
रोना
है
Firaq Gorakhpuri
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कहीं
पड़े
न
मोहब्बत
की
मार
होली
में
अदास
प्रेम
करो
दिल
से
प्यार
होली
में
Nazeer Banarasi
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मुझको
ये
नज़र
आया
के
वो
एक
बला
है
कुछ
ख़्वाब
है
कुछ
अस्ल
है
कुछ
तर्ज
-ए-
अदा
है
वो
ग़ैर
की
आग़ोश
में
रहने
लगा
शादाँ
उसको
नहीं
मालूम
के
दिल
मेरा
जला
है
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Navneet krishna
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इक
नज़ाकत
से
मुझे
उसने
पागल
बोला
जब
मैंने
चूम
लिया
प्यार
से
उसके
लब
को
Parwez Akhtar
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तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
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Subhan Asad
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आज
भी
वो
वो
ही
है
और
अदा
भी
वो
ही
है
बे-वफ़ा
भी
वो
ही
है
और
ख़फ़ा
भी
वो
ही
है
Aatish Indori
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तुम्हारी
इक
झलक
से
रंग
उल्फत
के
उड़ाए
हैं
नज़ारों
की
नज़ाकत
को
ज़रा
देखो
मेरी
जानाँ
Aniket sagar
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ख़ुदा
का
शुक्र
अदा
कर
वो
बे-वफ़ा
निकला
ख़ुशी
मना
कि
तिरी
जान
की
बहाली
हुई
Shakeel Jamali
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नहीं
जानते
हो
तो
जा
करके
पूछो
कुल्हाड़ी
बताएगी
लकड़ी
की
क़ीमत
Ashok Sagar
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कर्ज़
थोड़ा
क्या
लिया
घर
के
उजाले
के
लिए
फिर
कमाया
उम्र
भर
उस
ब्याज़
वाले
के
लिए
Ashok Sagar
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मैं
सालों
बाद
जब
भी
गाँव
जाता
हूँ
लिए
पीपल
की
ठंडी
छाँव
जाता
हूँ
कहीं
मैली
न
हो
जाए
ये
जन्नत
मैं
माँ
के
पास
नंगे
पाँव
जाता
हूँ
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Ashok Sagar
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हूँ
ज़रूरत
के
लिए
शहर
में
'सागर'
वरना
गाँव
से
जाने
में
ये
जान
निकल
जाती
है
Ashok Sagar
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वक़्त
के
साथ
पिलाया
है
इन्हें
अपना
लहू
तब
कहीं
जाके
उगी
है
ये
सुख़न
की
फसलें
Ashok Sagar
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