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Arohi Tripathi
faiz haasil hai nazre aalam men
faiz haasil hai nazre aalam men | फैज़ हासिल है नज़रे आलम में
- Arohi Tripathi
फैज़
हासिल
है
नज़रे
आलम
में
ठेस
पहुंचे
तो
पहुंचे
इस
ग़म
में
- Arohi Tripathi
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जीना
मुश्किल
है
के
आसान,
ज़रा
देख
तो
लो
लोग
लगते
हैं
परेशान,
ज़रा
देख
तो
लो
इन
चराग़ों
के
तले
ऐसे
अँधेरे
क्यूँँ
हैं?
तुम
भी
रह
जाओगे
हैरान,
ज़रा
देख
तो
लो
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Javed Akhtar
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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मेरे
तो
ग़म
भी
ज़माने
के
काम
आते
हैं
मैं
रो
पड़ूँ
तो
कई
लोग
मुस्कुराते
हैं
Tariq Qamar
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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हुआ
जौन
को
पढ़
के
मालूम
ये
उदासी
का
भी
इक
कलर
होता
है
Viru Panwar
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वो
हमारा
ग़म
चुरा
कर
ले
गया
साथ
अपने
ले
गया
तस्वीर
भी
Meem Alif Shaz
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हाल
दिल
का
सुना
नहीं
पाए
पास
होकर
बुला
नहीं
पाए
कौन
समझे
तुझे
सिवा
मेरे
जब
गले
हम
लगा
नहीं
पाए
लड़
झगड़
कर
चले
गए
थे
तुम
आज
चुप
चाप
जा
नहीं
पाए
काश
हम
सेे
ख़फा
नहीं
होता
यार
उसको
मना
नहीं
पाए
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Arohi Tripathi
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मुनाफ़िक
प्यार
में
तेरे
पड़ा
है
यक़ीनन
एक
दिन
ईमान
लेगी
Arohi Tripathi
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वो
हक़ीक़त
भी
ख़्वाब
कहता
है
लफ़्ज़-ए-अव्वल
किताब
कहता
है
जब
से
हरकत
सुनी
है
साँसों
की
तब
से
हरदम
शबाब
कहता
है
बात
होगी
अगर
अदाओं
की
हुस्न
गोया
अज़ाब
कहता
है
होंठ
पर
होंठ
उसने
रक्खा
फिर
लब
को
तब
से
गुलाब
कहता
है
मेरी
हर
बात
अच्छी
लगती
है
इस
जहाँ
को
ख़राब
कहता
है
जब
कभी
वो
क़रीब
आता
है
जाँ
हटाओ
नक़ाब
कहता
है
जब
से
हासिल
किया
मोहब्बत
को
खु़द
को
इश्क़-ए-निसाब
कहता
है
शे'र
अच्छा
बुरा
पढूँ
जो
भी
वो
फ़क़त
लाजवाब
कहता
है
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Arohi Tripathi
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सवेरा
ख़त्म
है
तो
शाम
आए
कहे
कोई
भला
नाकाम
आए
सभी
ने
साथ
छोड़ा
है
हमारा
वो
मेरे
हर
दुखों
में
काम
आए
दु'आ
करती
रहूँगी
ये
हमेशा
जहाँ
में
बस
उन्हीं
का
नाम
आए
हमारा
दिल
ख़ुशी
से
झूम
उट्ठा
अवध
में
आज
फिर
श्री
राम
आए
पुजारिन
मैं
भी
दर्शन
चाहती
हूँ
बड़ी
देरी
हुई
अब
धाम
आए
मोहब्बत
में
हुई
पागल
क़सम
से
भले
हम
पर
कोई
इल्ज़ाम
आए
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Arohi Tripathi
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तीसरी
दफ़ा
हम
सब
कुछ
समझ
गए
जानी
तीसरी
दफा
भी
तुमने
कहा
नहीं
कुछ
भी
Arohi Tripathi
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