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Arohi Tripathi
yaar har dam bizi bataata hai
yaar har dam bizi bataata hai | यार हर दम बिज़ी बताता है
- Arohi Tripathi
यार
हर
दम
बिज़ी
बताता
है
फोन
वो
क्यूँ
नहीं
उठाता
है
आपको
ये
ख़बर
नहीं
होगा
आजकल
शहर
रोज़
जाता
है
कुछ
नई
बात
पक
रही
होगी
वो
मुझे
यूँंँ
नहीं
जलाता
है
ये
मोहब्बत
बुखा़र
जैसा
है
दोष
वो
आग
को
लगाता
है
काश
जानी
समझ
गया
होता
यार
कितना
हमें
सताता
है
- Arohi Tripathi
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क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
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Farhat Ehsaas
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जब
सर-ए-शाम
पजीराई-ए-फ़न
होती
है
शाहज़ादी
को
कनीज़ों
से
जलन
होती
है
ले
तो
आया
हूँ
तुझे
घेर
के
अपनी
जानिब
आगे
इंसान
की
अपनी
भी
लगन
होती
है
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Azhar Faragh
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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आग
थे
इब्तिदा-ए-इश्क़
में
हम
अब
जो
हैं
ख़ाक
इंतिहा
है
ये
Meer Taqi Meer
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हो
न
हो
एक
ही
तस्वीर
के
दो
पहलू
हैं
रक़्स
करता
हुआ
तू
आग
में
जलता
हुआ
मैं
Shahid Zaki
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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ख़ुदा
के
लिए
अब
न
उस
सेे
मिलो
तुम
तुम्हें
अब
हमारी
जलन
की
क़सम
है
Tanoj Dadhich
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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मेरे
सीने
में
नहीं
तो
तेरे
सीने
में
सही
हो
कहीं
भी
आग
लेकिन
आग
जलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
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शब
की
हवा
से
हार
गई
मेरे
दिल
की
आग
यख़-बस्ता
शहर
में
कोई
रद्द-ओ-बदल
न
था
Qaisar-ul-Jafri
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प्रेम
राधा
प्रेम
मोहन
है
प्रेम
स्याही
प्रेम
दरपन
है
Arohi Tripathi
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इश्क़
करना
है
मुसीबत
डर
गए
ये
सोचकर
बाद
तेरे
इश्क़
वाले
मर
गए
ये
सोचकर
Arohi Tripathi
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रात
में
जब
भी
ख़्वाब
देखेगा
बा-ख़ुदा
ला-जवाब
देखेगा
उसकी
ख़्वाहिश
थी
हुस्न
को
देखे
ज़लवा-ए-आफ़ताब
देखेगा
मैंने
इस
ख़ौफ़
में
नहीं
छोड़ा
क्या
ख़बर
क्या
अज़ाब
देखेगा
जिसकी
ख़ातिर
हमें
गया
छोड़ा
उसको
भी
बे-नक़ाब
देखेगा
देखना
रो
पड़ेगा
वो
लड़का
इश्क़
का
जब
हिसाब
देखेगा
तब
उसे
हो
यक़ीं
मोहब्बत
पे
क़ब्र
में
जब
जनाब
देखेगा
शर्म
से
सर
झुकाए
होगा
वो
जब
कफ़न
का
हिजाब
देखेगा
वो
हमारे
बग़ैर
ही
मुर्शिद
क्या
ही
अच्छा
ख़राब
देखेगा
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Arohi Tripathi
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एक
तो
हम
से
शा'इरी
न
हुई
और
ये
भी
कि
ख़ुद-कुशी
न
हुई
इश्क़
में
ख़ाक
हो
गए
हम
तो
लोग
कहते
हैं
आशिक़ी
न
हुई
एक
ख़्वाहिश
थी
आख़िरी
मेरी
वो
मुकम्मल
भी
आख़िरी
न
हुई
क़ब्र
पे
आप
मेरी
आ
जाना
आप
की
ग़ैर-हाज़िरी
न
हुई
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Arohi Tripathi
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या
तो
नफ़रत
ख़राब
है
जानी
या
मोहब्बत
ख़राब
है
जानी
आज
आग़ोश
में
गिरे
उसके
फिर
तबीअत
ख़राब
है
जानी
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Arohi Tripathi
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