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Mohd Arham
muddaton baad ham hue yakjaa
muddaton baad ham hue yakjaa | मुद्दतों बाद हम हुए यकजा
- Mohd Arham
मुद्दतों
बाद
हम
हुए
यकजा
और
फिर
आ
गए
दोबारा
लोग
- Mohd Arham
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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इंसाँ
की
ख़्वाहिशों
की
कोई
इंतिहा
नहीं
दो
गज़
ज़मीं
भी
चाहिए
दो
गज़
कफ़न
के
बाद
Kaifi Azmi
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फूल
कर
ले
निबाह
काँटों
से
आदमी
ही
न
आदमी
से
मिले
Khumar Barabankvi
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तदबीर
के
दस्त-ए-रंगीं
से
तक़दीर
दरख़्शाँ
होती
है
क़ुदरत
भी
मदद
फ़रमाती
है
जब
कोशिश-ए-इंसाँ
होती
है
Hafeez Banarasi
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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क़ब्रों
में
नहीं
हम
को
किताबों
में
उतारो
हम
लोग
मोहब्बत
की
कहानी
में
मरे
हैं
Ajaz tawakkal
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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तेरी
फुरक़त
है
रात
दिन
तारी
तेरी
यादों
मैं
सिर
पटकते
हैं
Mohd Arham
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ऐसा
लगता
है
देखी
दाखी
है
ज़िंदगी
कोई
फ़िल्म
जैसी
है
पाँव
फैला
के
देखा
तो
जाना
दुनिया
कमरे
से
ज़्यादा
छोटी
है
हिज्र
के
दिन
हैं
और
घड़ी
उस
पर
जाने
क्यूँ
उल्टे
पाँव
चलती
है
हाफ़िज़ा
कौन
कर
रहा
है
मेरा
किसके
रटने
से
हिचकी
आई
है
एक
रस्ता
है
आप
तक
जाता
और
उस
में
भी
अफ़रा
तफ़री
है
मैं
मुदावा
करूँगा
क्यूँँ
ग़म
का
मुझको
प्यारी
मेरी
उदासी
है
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Mohd Arham
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किया
है
ज़ाया'
तुमने
ईद
का
दिन
भी
गले
लगने
के
वरना
सौ
बहाने
थे
Mohd Arham
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उधर
छपने
लगे
थे
कार्ड
शादी
के
इधर
लड़के
ने
सुन
के
ख़ुद-कुशी
कर
ली
Mohd Arham
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पता
उसका
बताया
है
किसी
ने
मुझे
फिर
से
रुलाया
है
किसी
ने
कोई
तो
पास
आकर
हाल
पूछो
मेरे
दिल
को
दुखाया
है
किसी
ने
न
मुमकिन
है
वो
मेरे
पास
आए
जिसे
अपना
बनाया
है
किसी
ने
यहीं
वो
साथ
मेरे
था
किसी
दिन
यहीं
मुझको
सताया
है
किसी
ने
चलो
फिर
से
कहीं
दिल
को
लगाएँ
कि
नज़रों
से
बुलाया
है
किसी
ने
यूँँ
ही
लंबी
नहीं
है
रात
अरहम
गले
उसको
लगाया
है
किसी
ने
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Mohd Arham
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