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Mohd Arham
badi bechaini se vo chat pe aati hai
badi bechaini se vo chat pe aati hai | बड़ी बेचैनी से वो छत पे आती है
- Mohd Arham
बड़ी
बेचैनी
से
वो
छत
पे
आती
है
गली
में
यानी
कोई
अब
भी
रहता
है
- Mohd Arham
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नश्शा-हा
शादाब-ए-रंग-ओ-साज़-हा
मस्त-ए-तरब
शीशा-ए-मय
सर्व-ए-सब्ज़-ए-जू-ए-बार-ए-नग़्मा
है
Mirza Ghalib
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उन्हीं
के
फ़ैज़
से
बाज़ार-ए-अक़्ल
रौशन
है,
जो
गाह
गाह
जुनूँ
इख़्तियार
करते
रहे
Faiz Ahmad Faiz
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मेरे
जुनूँ
का
नतीजा
ज़रूर
निकलेगा
इसी
सियाह
समुंदर
से
नूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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भोले
बन
कर
हाल
न
पूछ
बहते
हैं
अश्क
तो
बहने
दो
जिस
से
बढ़े
बेचैनी
दिल
की
ऐसी
तसल्ली
रहने
दो
Arzoo Lakhnavi
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ऐ
इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
हाँ
इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज
एक
सितमगर
को
हँस
हँस
के
रुलाना
है
Jigar Moradabadi
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हम
को
जुनूँ
क्या
सिखलाते
हो
हम
थे
परेशाँ
तुम
से
ज़ियादा
चाक
किए
हैं
हम
ने
अज़ीज़ो
चार
गरेबाँ
तुम
से
ज़ियादा
Majrooh Sultanpuri
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उस
से
बढ़
कर
किया
मिलेगा
और
इनआम-ए-जुनूँ
अब
तो
वो
भी
कह
रहे
हैं
अपना
दीवाना
मुझे
Hafeez Banarasi
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करे
जो
क़ैद
जुनूँ
को
वो
जाल
मत
देना
हो
जिस
में
होश
उसे
ऐसा
हाल
मत
देना
जो
मुझ
सेे
मिलने
का
तुमको
कभी
ख़याल
आए
तो
इस
ख़याल
को
तुम
कल
पे
टाल
मत
देना
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Kashif Adeeb Makanpuri
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मेरी
बेचैनी
का
आलम
मेरी
बेचैनी
से
पूछो
मेरे
चहरे
से
पूछोगे
कहेगा
ठीक
है
सब
कुछ
Aqib khan
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हमें
तुम
सेे
मोहब्बत
हो
गई
है
बड़ी
नाज़ुक
तबीअत
हो
गई
है
नहीं
लगता
कहीं
भी
दिल
हमारा
न
जाने
कैसी
हालत
हो
गई
है
लबों
ने
छू
लिया
है
फिर
लबों
को
लबों
से
फिर
शरारत
हो
गई
है
गले
जब
से
लगाया
हमने
तुमको
ग़मए-दुनिया
से
फ़ुर्सत
हो
गई
है
वफ़ा
से
सबका
दिल
अब
उठ
रहा
है
वफ़ा
मानो
सियासत
हो
गई
है
बड़े
ख़ामोश
से
रहते
हो
अरहम
तुम्हें
ये
किसकी
आदत
हो
गई
है
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Mohd Arham
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ऐसा
लगता
है
देखी
दाखी
है
ज़िंदगी
कोई
फ़िल्म
जैसी
है
पाँव
फैला
के
देखा
तो
जाना
दुनिया
कमरे
से
ज़्यादा
छोटी
है
हिज्र
के
दिन
हैं
और
घड़ी
उस
पर
जाने
क्यूँ
उल्टे
पाँव
चलती
है
हाफ़िज़ा
कौन
कर
रहा
है
मेरा
किसके
रटने
से
हिचकी
आई
है
एक
रस्ता
है
आप
तक
जाता
और
उस
में
भी
अफ़रा
तफ़री
है
मैं
मुदावा
करूँगा
क्यूँँ
ग़म
का
मुझको
प्यारी
मेरी
उदासी
है
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Mohd Arham
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नफ़स
में
उसके
कोई
है
जो
उसका
है
वगरना
कौन
ख़ुद
से
बातें
करता
है
मोहब्बत
में
वो
इक
हारा
हुआ
लड़का
जो
उस
सेे
हाल
पूछो
रोने
लगता
है
न
है
उम्मीद
उसके
लौट
आने
की
मगर
वो
राह
उसकी
अब
भी
तकता
है
बड़ी
बेचैनी
से
वो
छत
पे
आती
है
गली
में
यानी
कोई
अब
भी
रहता
है
सितारे
सब
उसी
के
साथ
चलते
हैं
हमारे
साथ
आख़िर
कौन
चलता
है
कहानी
ख़त्म
तेरी
हो
चुकी
'अरहम'
उसे
अब
प्यार
कोई
और
करता
है
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Mohd Arham
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ख़ुद
को
तेरे
हवाले
करके
हम
रात
भर
करवटें
बदलते
हैं
Mohd Arham
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हमने
जो
भी
किया
वो
बोया
है
उसको
पा
के
भी
हमने
खोया
है
जो
न
रोया
किसी
के
मरने
पर
तेरे
जाने
से
वो
भी
रोया
है
उसने
देखा
नहीं
मुझे
मुड़
के
वो
जो
बाहों
में
मेरे
सोया
है
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Mohd Arham
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