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Amol
samandar banata ya saahil banata
samandar banata ya saahil banata | समुंदर बनाता या साहिल बनाता
- Amol
समुंदर
बनाता
या
साहिल
बनाता
मैं
क़तरा
किसी
के
तो
काबिल
बनाता
सफ़र
काश
होता
मुक्कमल,
मुझे
गर
कभी
रास्ता
अपनी
मंज़िल
बनाता
- Amol
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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नहीं
आबो
हवा
में
ताज़गी
अब
दवा
की
सीसियों
में
ज़िन्दगी
है
Umesh Maurya
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पहले
उसकी
ख़ुशबू
मैंने
ख़ुद
पर
तारी
की
फिर
मैंने
उस
फूल
से
मिलने
की
तैयारी
की
इतना
दुख
था
मुझको
तेरे
लौट
के
जाने
का
मैंने
घर
के
दरवाजों
से
भी
मुँह
मारी
की
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Tehzeeb Hafi
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फासलों
से
जो
सँभाले
हैं
रखा
इक
शख़्स
को
टूट
जाता
जो
मिरी
आग़ोश
में
आता
कभी
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उसकी
जो
दी
घड़ी
पहनना
छोड़ा
हैं
वक़्त
जैसे
गुज़रना
तो
भुल
ही
गया
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भुल
गया
हैं
तू
मुझे
पूरी
तरह
से
याद
करने
में
तुझे
क्या
मसअला
अब
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कौन
चाहेगा
तुझे
अब
इस
तरह
से
के
मैं
चाहूँ
तो
तुझे
भी
ना
ख़बर
हो
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ग़मों
को
मिरे
जो
गिना
जा
रहा
हैं
कि
मशगूल
होके
सुना
जा
रहा
हैं
मिरी
हैं
ये
किस्मत
या
फिर
सजा
हैं
कि
क़ातिल
मुझी
से
चुना
जा
रहा
हैं
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