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Alankrat Srivastava
kisi mehfil men ham jab pyaare pyaare she'r kahte hain
kisi mehfil men ham jab pyaare pyaare she'r kahte hain | किसी महफ़िल में हम जब प्यारे प्यारे शे'र कहते हैं
- Alankrat Srivastava
किसी
महफ़िल
में
हम
जब
प्यारे
प्यारे
शे'र
कहते
हैं
तेरे
भौं
के
इशारे
के
सहारे
शे'र
कहते
हैं
नहीं
कुछ
ख़ासियत
मेरी
है
मेरे
शे'र
कहने
में
सभी
'आशिक़
सभी
प्रीतम
तुम्हारे
शे'र
कहते
हैं
- Alankrat Srivastava
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फिर
नज़र
में
फूल
महके
दिल
में
फिर
शमएँ
जलीं
फिर
तसव्वुर
ने
लिया
उस
बज़्म
में
जाने
का
नाम
Faiz Ahmad Faiz
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ये
गूँगों
की
महफ़िल
है
निकलना
ही
पड़ेगा
क्या
इतनी
ख़ता
कम
है
कि
हम
बोल
पड़े
हैं
Waseem Barelvi
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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हमीं
हैं
सोज़
हमीं
साज़
हैं
हमीं
नग़्मा
ज़रा
सँभल
के
सर-ए-बज़्म
छेड़ना
हम
को
Moin Ahsan Jazbi
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पत्थर
के
इस
जहाँ
में
थी
रोने
लगी
सभा
जब
आदमी
ने
आदमी
को
आदमी
कहा
SHIV SAFAR
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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तेरे
होते
हुए
महफ़िल
में
जलाते
हैं
चराग़
लोग
क्या
सादा
हैं
सूरज
को
दिखाते
हैं
चराग़
Ahmad Faraz
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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल
न
पूछिए
'मजरूह'
शराब
एक
है
बदले
हुए
हैं
पैमाने
Majrooh Sultanpuri
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ज़ेहन
से
यादों
के
लश्कर
जा
चुके
वो
मेरी
महफ़िल
से
उठ
कर
जा
चुके
मेरा
दिल
भी
जैसे
पाकिस्तान
है
सब
हुकूमत
करके
बाहर
जा
चुके
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Tehzeeb Hafi
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मुझे
अँधेरे
से
बात
करनी
है
सो
करा
दो,
दिया
बुझा
दो
कुछ
एक
लम्हों
को
रौशनी
का
गला
दबा
दो,
दिया
बुझा
दो
रिवाज़-ए-महफ़िल
निभा
रहा
हूँ
बता
रहा
हूँ
मैं
जा
रहा
हूँ
मुझे
विदा
दो,
जो
रोना
चाहे
उन्हें
बुला
दो,
दिया
बुझा
दो
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Vikram Gaur Vairagi
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बहुत
खोजा
मगर
फिर
भी
किनारा
ना
मिला
मुझ
को
मिला
सबका
मगर
तेरा
सहारा
ना
मिला
मुझ
को
Alankrat Srivastava
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हफ़्त-क़ुल्ज़ुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
तेरे
कुमकुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
है
बहुत
चीज़ें
मगर
मुझको
तो
आदतन
तुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
गीत
जो
तुम
को
लुभाते
हैं
जी
उस
तरन्नुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
हैं
जिस
सहारे
मैं
ग़ज़ल
कहता
था
उस
तलातुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
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Alankrat Srivastava
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उस
सेे
ज़्यादा
हो
तुम
मेरे
मन
के
लिए
जितनी
प्यारी
है
राधा
किशन
के
लिए
Alankrat Srivastava
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हूँ
कैसा
आदमी
संकट
में
हँसता
जा
रहा
हूँ
मैं
बुरे
हर
काम
करके
भी
सभी
को
भा
रहा
हूँ
मैं
ज़माने
भर
के
दिल
को
तोड़
के
आया
हूँ
मैं
औ
अब
उन्हीं
के
दुख
को
अपना
दुख
बता
कर
गा
रहा
हूँ
मैं
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Alankrat Srivastava
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है
अगर
तुमको
यहाँँ
होना
अमर
तो
कहो
ना
यार
ग़ालिब
सी
ग़ज़ल
Alankrat Srivastava
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