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Alankrat Srivastava
bahut khoja magar phir bhi kinaara na mila mujh ko
bahut khoja magar phir bhi kinaara na mila mujh ko | बहुत खोजा मगर फिर भी किनारा ना मिला मुझ को
- Alankrat Srivastava
बहुत
खोजा
मगर
फिर
भी
किनारा
ना
मिला
मुझ
को
मिला
सबका
मगर
तेरा
सहारा
ना
मिला
मुझ
को
- Alankrat Srivastava
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वतन
की
ख़ाक
ज़रा
एड़ियाँ
रगड़ने
दे
मुझे
यक़ीन
है
पानी
यहीं
से
निकलेगा
Unknown
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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मुझे
अपना
किनारा
कम
था
'दानिश'
बढ़ा
ली
मैंने
फिर
गहराई
अपनी
Madan Mohan Danish
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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मुहब्बत
में
जो
माथा
चूम
कर
वा'दा
किया
उसने
उसे
भी
आम
बातों
का
ही
दर्जा
दे
दिया
उसने
सुधा
के
नाम
पर
विषपान
अब
हम
सेे
नहीं
होगा
सुना
ज्यूँँ
ही
मुहब्बत
से
किनारा
कर
लिया
उसने
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Atul K Rai
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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काम
आया
तिरंगा
कफ़न
के
लिए
कोई
क़ुर्बां
हुआ
था
वतन
के
लिए
सोचो
क्या
कर
लिया
तुमने
जी
कर
के
दोस्त
नस
भी
काटी
तो
बस
इक
बदन
के
लिए
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Neeraj Neer
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बहुत
मुश्किल
है
कोई
यूँँ
वतन
की
जान
हो
जाए
तुम्हें
फैला
दिया
जाए
तो
हिन्दुस्तान
हो
जाए
Kumar Vishwas
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बड़ी
शिद्दत
से
जो
पुतला
सजाया
था
सभी
मिल
के
उसे
ही
अब
जलाएंगे
Alankrat Srivastava
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ले
के
अपनी
अना
मैं
किधर
जाऊँगा
जैसे
मरते
हैं
सब
मैं
भी
मर
जाऊँगा
तुम
अगर
फूल
हो
मैं
मुमाखी
हूँ
फिर
तुम
जिधर
जाओगी
मैं
उधर
जाऊँगा
काम
जो
लग
रहे
हैं
हैं
मुमकिन
नहीं
तुम
इशारा
करो
मैं
वो
कर
जाऊँगा
कब
कहा
मैंने
तुम
उम्र
भर
साथ
दो
देख
भी
लोगी
गर
मैं
सँवर
जाऊँगा
तोड़
कर
पर्वतों
को
ही
मूरत
बनी
तुमने
तोड़ा
है
अब
मैं
निखर
जाऊँगा
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Alankrat Srivastava
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फ़लां
ने
कहा
है
फ़लाने
से
हैं
हम
की
हुलिए
से
देखो
दिवाने
से
हैं
हम
हैं
सुनते
नहीं
अब
तो
हम
भी
किसी
की
बुरा
इस
में
क्या
है
ज़माने
से
हैं
हम
हमें
सुन
के
लोगों
को
राहत
मिलेगी
रफ़ी
के
किसी
प्यारे
गाने
से
हैं
हम
यहाँ
हम
सा
दूजा
कहाँ
से
मिलेगा
नई
सी
है
दुनिया
पुराने
से
हैं
हम
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Alankrat Srivastava
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हफ़्त-क़ुल्ज़ुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
तेरे
कुमकुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
है
बहुत
चीज़ें
मगर
मुझको
तो
आदतन
तुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
गीत
जो
तुम
को
लुभाते
हैं
जी
उस
तरन्नुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
हैं
जिस
सहारे
मैं
ग़ज़ल
कहता
था
उस
तलातुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
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Alankrat Srivastava
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मुझे
जिस
से
झगड़ना
था
तेरी
ख़ातिर
उसी
दुल्हे
के
सर
सेहरा
सजाया
है
Alankrat Srivastava
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