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Alankrat Srivastava
jalpari tum pe to saare rang achchhe hi lagenge
jalpari tum pe to saare rang achchhe hi lagenge | जलपरी तुम पे तो सारे रंग अच्छे ही लगेंगे
- Alankrat Srivastava
जलपरी
तुम
पे
तो
सारे
रंग
अच्छे
ही
लगेंगे
पर
गुलाबी
रंग
में
तुम
और
अच्छी
लग
रही
हो
- Alankrat Srivastava
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उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
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मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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निगाहें
फेर
ली
घबरा
के
मैंने
वो
तुम
से
ख़ूब-सूरत
लग
रही
थी
Fahmi Badayuni
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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बंद
कमरा,
सर
पे
पंखा,
तीरगी
है
और
मैं
एक
लड़ाई
चल
रही
है
ज़िंदगी
है
औऱ
मैं
Shadab Asghar
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बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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भरोसा
था
मुझको
न
बदलेगा
वो
पर
बदलते
सभी
हैं
यहाँ
हौले
हौले
Alankrat Srivastava
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फ़लां
ने
कहा
है
फ़लाने
से
हैं
हम
की
हुलिए
से
देखो
दिवाने
से
हैं
हम
हैं
सुनते
नहीं
अब
तो
हम
भी
किसी
की
बुरा
इस
में
क्या
है
ज़माने
से
हैं
हम
हमें
सुन
के
लोगों
को
राहत
मिलेगी
रफ़ी
के
किसी
प्यारे
गाने
से
हैं
हम
यहाँ
हम
सा
दूजा
कहाँ
से
मिलेगा
नई
सी
है
दुनिया
पुराने
से
हैं
हम
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Alankrat Srivastava
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दिल
की
कमज़ोरी
मेरी
पहचान,
प्यारी
उड़ती
ज़ुलफ़ें
और
ये
मुस्कान
प्यारी
Alankrat Srivastava
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फ़लां
ने
कहा
है
फ़लाने
से
हैं
हम
की
हुलिए
से
देखो
दिवाने
से
हैं
हम
हैं
सुनते
नहीं
हम
किसी
आदमी
की
अलग
कुछ
कहाँ
है?
ज़माने
से
हैं
हम
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Alankrat Srivastava
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चढ़
चुका
रंग
जिस
पर
तेरे
प्रेम
का
होली
का
रंग
उस
पर
चढ़ेगा
नहीं
Alankrat Srivastava
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