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Alankrat Srivastava
dil ki kamzori meri pahchaan pyaari
dil ki kamzori meri pahchaan pyaari | दिल की कमज़ोरी मेरी पहचान, प्यारी
- Alankrat Srivastava
दिल
की
कमज़ोरी
मेरी
पहचान,
प्यारी
उड़ती
ज़ुलफ़ें
और
ये
मुस्कान
प्यारी
- Alankrat Srivastava
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लब
पे
आता
था
जो
दु'आ
बन
कर
दिल
में
रहता
है
अब
ख़ला
बन
कर
कितना
इतरा
रहा
है
अब
वो
फूल
तेरे
बालों
का
मोगरा
बन
कर
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Haider Khan
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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अब
तो
मैं
बाल
बढ़ा
सकता
हूँ
हिज्र
में
कितनी
सहूलत
है
मुझे
Nasir khan 'Nasir'
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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और
भी
दुनिया
में
मंज़र
ख़ूब-सूरत
हैं
मगर
तेरी
ज़ुल्फ़ों
झटकने
से
सुहाना
कुछ
नहीं
Alankrat Srivastava
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करती
है
तो
करने
दे
हवाओं
को
शरारत
मौसम
का
तकाज़ा
है
कि
बालों
को
खुला
छोड़
Abrar Kashif
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वहम
होता
है
कि
छूने
से
सँवर
जाएँगी
सोचता
हूँ
जो
मुक़द्दर
मिरा
ज़ुल्फ़ें
तेरी
Neeraj Neer
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हम
हुए
तुम
हुए
कि
'मीर'
हुए
उस
की
ज़ुल्फ़ों
के
सब
असीर
हुए
Meer Taqi Meer
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पूछा
जो
उन
सेे
चाँद
निकलता
है
किस
तरह
ज़ुल्फ़ों
को
रुख़
पे
डाल
के
झटका
दिया
कि
यूँँ
Arzoo Lakhnavi
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कुछ
इस
के
सँवर
जाने
की
तदबीर
नहीं
है
दुनिया
है
तिरी
ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर
नहीं
है
Hafeez Banarasi
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मोहब्बत
के
हम
सब
समुंदर
है
जानी
समुंदर
के
जिस
के
किनारे
हो
तुम
सब
Alankrat Srivastava
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भरी
आवाज़
से
ही
ग़म
का
अंदाज़ा
लगा
लेना
वो
क्या
है
ना
कि
लड़का
हूँ
सो
खुल
के
रो
नहीं
सकता
Alankrat Srivastava
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कि
देखो
ख़ूब-सूरत
लग
रही
है
ना
ये
पहले
से
हाँ
इस
तस्वीर
की
मैंने
ही
कल
ज़ुल्फ़ें
सँवारी
थी
Alankrat Srivastava
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झूठों
से
तो
आप
को
काफ़ी
नफ़रत
है
फिर
क्यूँ
जी
सरकार
की
बातें
करते
हो
Alankrat Srivastava
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कैसे
कह
दूँ
कि
जीवन
से
ग़म
दूर
हैं
सच
तो
ये
है
कि
तुम
और
हम
दूर
हैं
हम
मिलेंगे
दुबारा
से
अगले
जनम
ग़म
यही
है
की
अगले
जनम
दूर
हैं
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Alankrat Srivastava
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